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हर तीसरे दिन लापता हो रहा एक शख्स, अपनों की तलाश में भटक रहे परिजन

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यमुनानगर। जिले में न तो मानव तस्करी हो रही है और न ही कोई गिरोह सक्रिय है, लेकिन इसके बावजूद जिले के लोग लापता हो रहे हैं। अपनों के जुदाई का दर्द केवल वही लोग बयां कर सकते हैं जो पिछले कई सालों से लापता हुए अपनों की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आज भी लोग घर की चौखट पर टकटकी लगाए उनका इंतजार कर रहे हैं। पुलिस आंकड़ों के ही मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान करीब चार सौ लोग लापता हुए। इनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं। महिलाओं में भी युवा लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें बड़ी संख्या में नाबालिग भी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस की ओर से प्रयास करने के दावों के बावजूद इनमें से आधे से भी ज्यादा लापता लोग कहां, किस हाल में है, किसी को नहीं पता चला। पुलिस इन मामलों में गुमशुदगी की रिपोर्ट तो दर्ज कर लेती है, लेकिन उनकी तलाश करने के प्रयास सफल नहीं हो पाते हैं।
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केस एक
फर्कपुर क्षेत्र से मजदूरी का काम करने वाले एक शख्स की 18 साल की बेटी तीन साल पहले अचानक से लापता हो गई। बेटी की तलाश के लिए उसने थाने में शिकायत दी। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली। जवान बेटी के लापता होने से वह काम धंधा छोड़कर उसकी तलाश में जुट गए, लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चला। दो अन्य बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी होने के चलते वह थक हार कर काम पर जुट गया।
केस दो
रादौर थाना क्षेत्र से जून 2019 में एक ही महीने में 23 लोग लापता हो गए। इनमें से 12 महिलाएं और लड़कियां थी। वहीं फर्कपुर थाने से भी एक ही महीने में दस लोग लापता हो गए। जिनके बारे में कोई सुराग अभी तक नहीं चल सका है। ऐसा कोई थाना क्षेत्र नहीं बचा हुआ, जहां से कोई लापता न हो। हालांकि काफी संख्या में फर्कपुर, रादौर, यमुनानगर आदि थाना क्षेत्र से लोग गायब हो रहे हैं।
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लड़कियां ज्यादा हो रहीं लापता
जिले से बड़ी संख्या में लापता हो रहे लोगों में नाबालिग बालक-बालिकाओं के गायब होने और उनका पता नहीं लगने से मामला गंभीर होता जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड में जनवरी 2020 से 17 मार्च 2021 तक 51 लड़के और 99 लड़कियां लापता हुई। इनमें से लड़कों के 42 और लड़कियों के 74 मामले ट्रेसआउट किए गए। जबकि लड़कों के नौ और लड़कियों के 25 मामले अनट्रेस रहे। जिन्हें पुलिस तलाश नहीं कर पाई।
पुलिस प्रवक्ता चमकौर सिंह का कहना है कि शिकायत मिलते ही एफआईआर दर्ज की जाती है। उसके बाद गुमशुदा के बारे में पुलिस थानों एवं पुलिस वेबसाइट पर सूचना प्रसारित की जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर फोटो व नाम-पता आदि की जानकारी देते हुए पोस्टर लगाए जाते हैं। संचार माध्यमों से भी प्रचार-प्रसार कराया जाने का प्रावधान है। किसी तरह की सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी रवाना की जाती है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में बच्चे और व्यस्क अपने आप ही घर से चले जाते हैं और अपने आप ही लौट आते हैं। ऐसे मामलों में परिजनों द्वारा पुलिस को सूचित भी नहीं किया जाता।
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