संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 16 नवंबर को एशिया की सरस्वती शुगर मिल में पेराई की शुरूआत हो चुकी है। पूरे सीजन में 170 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होगी। वहीं मिल में रोजाना एक लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो रही है।
वहीं किसान पेराई के लिए मिल में धड़ाधड़ ट्रॉलियों में गन्ने को लोड कर पहुंच रहे। बकायदा इसके लिए 42 बिक्री सेंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा किसानों को पर्ची सिस्टम से गन्ना मंगवाया जा रहा है। सरस्वती शुगर मिल में बनने वाली चीनी भी काफी मशहूर है। यहां की चीनी की पश्चिम बंगाल तक धूम है। ऐसे में लोकल के अलावा यहां की चीन पंजाब, दिल्ली, हिमाचल, राजस्थान, गुजरात तक जाती है।
दरअसल इस मिल की चीनी की खासियत है यह वह मोटी है जोकि देखने में मिश्री की तरह लगती है। इतना ही नहीं कई बार चीनी को ऑर्डर पर तैयार भी करवाया जाता है, लेकिन ऐसी स्थिति कम होती है। ज्यादातर चीनी को पहले से ही मिल में तैयार कर लिया जाता है ताकि स्टॉक करने की नौबत न आए।
मिल में एक लाख क्विंटल गन्ने की पेराई रोज हो रही है। किसान समय से गन्ना लेकर पहुंच रहे हैं। किसानों को दिक्कत न आए इसके लिए लाइन सिस्टम लागू किया गया है। हमारी मिल की चीनी दूर-दूर तक दूसरे राज्यों में मशहूर है। - डीपी सिंह, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, सरस्वती शुगर मिल।