सीआईए ने खैर तस्करी के मामले में गिरफ्तार वन दरोगा व डिप्टी रेंजर को सोमवार को पर्यावरण अदालत कुरुक्षेत्र में पेश किया। जहां से उन्हें दो दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले की जांच एसआईटी इंचार्ज एवं सीआईए-2 के सब इंस्पेक्टर नरेश कुमार कर रहे है। नरेश कुमार ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपियों से पता किया जाएगा कि ये किस तरह कार्य को अंजाम देते थे। खैर तस्करी में इनका तरीका क्या था। कितने दिन से इस कार्य में संलिप्त है। जांच का विषय यह भी रहेगा कि पब्लिक मैन और वन कर्मी या अधिकारी इनका साथ नहीं दे रहे थे। रिमांड में और रिकवरी व अन्य वारदात का भी खुलासा हो सकता है।
बतां दे कि बीते शुक्रवार को सीआईए-2 ने वन विभाग यमुनानगर के डिप्टी रेंजर सर्वजीत को खैर तस्करी के मामले गिरफ्तार किया था। दो दिन के भीतर ही रविवार को पुलिस ने वन विभाग यमुनानगर के वन दरोगा मान सिंह व सिरमौर की बहराल चेकपोस्ट के डिप्टी रेंजर तरसेम सिंह को खैर तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। सोमवार को इन्हें पर्यावरण अदालत में पेश किया गया। ध्यान रहे खैर तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए जनवरी माह में एसपी राजेश कालिया ने एसआईटी का गठन किया था। जिसकी जिम्मेदारी सीआईए -2 के सब इंस्पेक्टर नरेश कुमार को दी गई थी। सब इंस्पेक्टर कुमार ने बताया कि खैर तस्करी के कुल 21 मामले हैं। अभी तक तीन अधिकारी पकड़े गए हैं। 15 के लगभग पब्लिक मैन पकड़े गए हैं। कुछ की गिरफ्तारी बाकी है। कार्रवाई में उनके साथ एएसआई राजेश कुमार, राय सिंह, रमेश राणा, हैड कांस्टेबल रोहण, राजू, कुलदीप व चरणजीत सिंह ने भी सहयोग किया है।
ऐसे आए थे पकड़ में :
26 फरवरी को वन विभाग ने सुबह चार बजे के लगभग 90 क्विंटल खैर पकड़ी। जिसका चालक मौके से फरार हो गया था। पूर्व में गिरफ्तार पावंटा साहिब निवासी सतपाल का लक्कड़ का कारोबार है। उसने पकड़ी गई खैर का एक दिन पहले यानि 25 फरवरी का बिल बना दिया। जांच अधिकारी के मुताबिक पकड़े गए वन दरोगा मान ङ्क्षसह ने खैर तस्कर अली हसन की मदद से कलेसर रेस्ट हाउस में करीब 20 दिन बाद इस पर निशान लगवा दिए। ताकि वह अनुमति की लकड़ी लगे। 27 मार्च को इसी मामले में खिजराबाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। बहराल चैकपोस्ट पर तैनात तरसेम ङ्क्षसह ने 26 फरवरी की दोपहर दो बजे इसका इंद्राज कर दिया। सीसीटीवी की फुटेज से सामने आया कि 12 से तीन बजे के बीच कोई गाड़ी निकली ही नहीं। फर्जी बिल और फर्जी इंद्राज का फायदा उठाकर मोह मद फारुख व अली हसन उस लकड़ी को कोर्ट से सुपरदारी पर छुड़ा ले गए।