मामूली कहासुनी के चलते दोस्त की चाकुओं से गोदकर हत्या करने के चार दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही चारों को 25-25 हजार रुपये पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर देने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में पौने दो साल चली सुनवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के फैसला आया है।
28 सितंबर 2014 को अशोक विहार कालोनी निवासी तारा चंद ने शहर पुलिस को शिकायत दी थी कि 27 सितंबर की रात को वह खाना खाने के बाद घर में सो गया। उसका बड़ा बेटा मनीष तथा पौता सन्नी (भाई दर्शन लाल का पौता) घर की छत पर सो रहे थे। रात को करीब 12 बजे गली से शोर सुनाई दिया। वह पत्नी और छोटे बेटे प्रमेश कुमार के साथ घर से बाहर निकले, तो चार लड़के मनीष को घेरे हुए थे। उनमें अशोक विहार कालोनी निवासी सोनू, मनीष, राहुल और रिंकू उर्फ रिंका थे। सोनू, रिंकू और राहुल ने उसके बेटे मनीष पर चाकू से हमला किया। जबकि मनीष ने उसके सिर में लोहे की राड से प्रहार किया। उन्होंने शोर मचाया तो वे चारों मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में मनीष को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
सरकारी वकील बलजीत सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की दलील सुनने के उपरांत अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डा. नरेश सिंहल की कोर्ट ने अशोक विहार कालोनी निवासी सोनू, मनीष, राहुल और रिंकू को मनीष की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। चारों पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना किया गया है। साथ ही उन्हें 25-25 हजार रुपये पीड़ित पक्ष को मुआवजे के तौर पर देने के आदेश दिए हैं।