जमीन के विवाद में गांव अराइयांवाला निवासी सेवाराम की हत्या के प्रयास और परिजनों से मारपीट करने के मामले में कोर्ट ने चार दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। चारों को 24 हजार रुपये जुर्माना और पीड़ित को 60 हजार रुपये हर्जाना भी देना होगा। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
गांव अराइयांवाला निवासी जगमाल सिंह ने बिलासपुर पुलिस को शिकायत दी थी कि 7 मई 2015 को वह भाई सेवाराम के साथ खेतों में काम कर रहा था। तभी गांव निवासी गुरमिंद्र, गुरप्रीत, मिल्क खास निवासी सुरेंद्र, मंगतराम और गांव बलाचौर निवासी अवतार ने सेवाराम की हत्या करने की नीयत से लाठी-डंडों से हमला कर दिया। उसने जब बीचबचाव किया तो आरोपियों ने उसे भी बुरी तरह पीटा। सेवाराम की पत्नी कैलाशो देवी पर हमला किया। सेवाराम की मेडिकल रिपोर्ट जांच के लिए पीजीआई रोहतक भेजी गई। डॉक्टरों ने उसे लगी चोटों को गंभीर बताया।
पुलिस ने जगमाल सिंह की शिकायत पर सुरेंद्र, गुरप्रीत, गुरमिंद्र, अवतार और मंगतराम के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. नरेश सिंहल की अदालत में चल रही थी। एक साल चली सुनवाई में करीब 12 लोगों की गवाही हुई। कोर्ट ने गांव मिल्क खास निवासी मंगतराम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अवतार, सुरेंद्र, गुरप्रीत और गुरमिंद्र को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद तथा जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषी पीड़ित सेवाराम को 30 हजार, जगमाल सिंह और कैलाशो को 15-15 हजार रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर देंगे।