अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
लगभग दो साल पहले छप्पर में बिना लाइसेंस के प्रतिबंधित दवाइयों के साथ पकड़े गए गांव रामपुर माजरा निवासी किरण कुमार और रतनपुरा निवासी राजकुमार को कोर्ट ने 14-14 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला एडिशनल सेशन जज डॉ. अब्दुल माजिद की कोर्ट ने सुनाया है। दोनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान है। कोर्ट में इस केस की करीब दो साल तक सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
ऐसे पकड़ में आए थे दोषी :
एएसआई निर्मल सिंह ने छप्पर पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 27 मई 2016 को वह एचसी चुन्नी लाल और ईएचसी जसजीत सिंह के साथ मिलकर थाना छप्पर में अंबाला रोड पर चेकिंग कर रहे थे। तभी एक नैनो कार अंबाला की तरफ से आती दिखाई दी। कार को रुकवा कर उसकी चेकिंग की गई। डिग्गी खोली तो उसमें से 16 पैकेट कोरेक्स के थे। छह डिब्बे लैमोटिल के थे। इनमें 35 हजार 940 टेबलेट थी। पुलिस ने मौके से कार में सवार रामपुर माजरा निवासी किरण और रतनपुरा निवासी राजकुमार को हिरासत में लिया गया। उनके पास इन दवाइयों का कोई लाइसेंस नहीं था। दवाईयों की जांच के लिए ड्रग कंट्रोल अधिकारी रीतू को सूचित कर मौके पर बुलाया गया। जिन्होंने बताया कि इन दवाइयों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रतिबंध के बावजूद वे इसे बेच रहे है। पुलिस ने दोनों पकड़े गए लोगों पर धारा-22/44/28 एनडीपीएस एक्ट 1985 में केस दर्ज किया था। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि वे इन दवाईयों को सप्लाई करने जा रहे थे।