पूर्व सरपंच व उसके बेटे को साथ लेकर पुलिस की तीन टीमें कर रही हैं संजीव की तलाश
- पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया समेत परिवार के 8 लोगों का हत्यारे दामाद संजीव के पैरोल से वापस न लौटने का मामला
- दो टीमों ने यूपी व हिमाचल में डेरा डाला, पुलिस को नहीं मिल रही लोकेशन नहीं मिल रही
-जमानत से जुड़े सभी लोगों पर हो सकती है कार्रवाई
यमुनानगर। पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया समेत परिवार के 8 लोगों का हत्यारे दामाद संजीव की लोकेशन पुलिस ट्रेस आउट नहीं कर सकी है। उसके पकड़ने के लिए पुलिस की तीन टीमों का गठन किया गया है। दो टीमें यूपी व हिमाचल में डेरा डाले हुए है। जबकि एक टीम हरियाणा व दिल्ली एनसीआर के शहरों में छापे मार रही है। पुलिस को गुड़गांव से संजीव के बारे में कुछ क्लू हाथ लगे हैं। पुलिस संजीव की जमानत में सहयोग करने वाले पूर्व सरपंच बलदेव व उसके बेटे रिक्की को साथ लेकर उसके छिपने के संभावित स्थानों पर छापे मार रही है। हालांकि अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं। वहीं उच्चाधिकारियों का कहना है कि संजीव की जमानत कराने में अगर किसी ने फर्जीवाड़ा किया है या फिर गलत सूचनाएं देकर गुमराह किया है। उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पैरोल लेने के लिए ही किराए पर लिया था : मकान चगनौली गांव के सरपंच सिरमौर सिंह ने बताया कि बलदेव सिंह गांव का पहले सरपंच रह चुका है। वह भला आदमी है। मेरे पास बिलासपुर पुलिस की तरफ से पूर्व सरपंच बलदेव सिंह की वेरिफिकेशन आई थी। इसमें मैंने कहा था कि बलदेव सिंह का चालचलन ठीक है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अगर संजीव की वेरिफिकेशन आती तो वह छानबीन करता। बलदेव ने कब संजीव की मां को किराए पर मकान दिया। कब उसके बेटे ने संजीव को जमानत दिलवाने में मदद की। इसकी कोई जानकारी नहीं थी। यह सब गुपचुप तरीके से हुआ। गांव में रहने के लिए संजीव यहां कभी नहीं आया। लोगों ने तो उसकी मां को भी यहां नहीं देखा था। घर में केवल चारपाई है और अन्य कोई सामान नहीं है। उन्होंने केवल पेरोल लेने के लिए ही इस मकान को किराए पर लिया था।
चगनौली कभी नहीं आया संजीव : पैरोल अर्जी पर संजीव ने गांव चगनौली के अस्थायी पते का जिक्र किया। चगनौली निवासी पूर्व सरपंच बलदेव सिंह ने संजीव की मां को अपने मकान में किराएदार बताया था। एक हजार रुपये का किरायानामा दिया। दरअसल जब वह सरपंच था तो उसका बेटा रिक्की व तीन अन्य युवक एक आपराधिक मामले में जेल गए थे। जगाधरी जेल में उसकी संजीव से जानकारी हो गई थी। उस दौरान संजीव ने बहाना किया था कि उसकी मां को मुलाकात के लिए दूर से आना पड़ता है। कई बार लेट हो जाती है। इसलिए अपने गांव में एक कमरा किराए पर दिलवा दो। इसी के चलते रिक्की ने कमरा दिलवाने में मदद की। बाद में संजीव को पेरोल दिलवाने में भी मददगार बना।
कई महीने से बना रहा था पेरोल की प्लानिंग : फरीदाबाद जेल में रहते हुए संजीव ने परिवार से मिलने का तर्क देकर 16 अक्टूबर 2017 को पैरोल मांगी थी। 18 फरवरी को सोनिया-संजीव को कुरुक्षेत्र जेल में ट्रांसफर किया। अपनी अर्जी में चंगनौली के बलदेव सिंह के मकान को अस्थायी पता और सहारनपुर की लक्ष्मण कॉलोनी का स्थायी पता बताया। फरीदाबाद जेल प्रबंधन ने वेरीफिकेशन के लिए यमुनानगर डीसी व एसपी को लिखा। एसपी ने बिलासपुर थाना पुलिस से रिहायश व मकान को लेकर वेरीफिकेशन करवा कर रिपोर्ट भेजी थी। उसके बाद 16 मई को उसे पेरोल मिल गई। अब 31 मई को उसे वापस जाना था, लेकिन वह वापस जेल नहीं गया तो कुरुक्षेत्र के जेल अधीक्षक ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई।
वर्जन
-संजीव की तलाश में पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं। बिलासपुर थाना एसएसओ केस को हैंडल कर रहे हैं। दो टीमें बाहरी राज्यों में हैं। जहां से भी क्लू मिल रहा है, वहीं पुलिस की टीम दबिश दे रही है। जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा। अभी पहली प्राथमिकता संजीव को पकड़ने की है। उसके पेरोल की प्रक्रिया के दौरान कोई फर्जीवाड़ा हुआ है तो वह जांच का विषय है। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-आशीष चौधरी, डीएसपी, बिलासपुर