संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम में सत्ता पक्ष के पार्षदों का आरोप है कि बिजली निगम के अधिकारी उन्हें धमकाते हैं। बिजली निगम के एसडीओ उन पर सरकारी काम में बाधा पहुंचने से लेकर थाने में केस दर्ज कराने की धमकी देते हैं। पार्षदों ने कहा कि वह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और उनकी आवाज को उठाते रहेंगे। हाउस की बैठक में पार्षदों की बात सुनकर नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद ने बिजली निगम के एक्सईएन से जवाब मांगा तो वह बैठक में आए ही नहीं। उनकी जगह मॉडल टाउन के एसडीओ अजय अग्रवाल जवाब देने के लिए आगे आए।
एसडीओ कहने लगे कि एक्सईएन के कभी मीटिंग में होने तो कभी पंचकूला जाने की बात कहने लगे। परंतु आयुक्त ने उनकी कोई भी बात सुनने इंकार कर दिया और हाउस से जाने को कहा। मेयर सुमन बहमनी ने बैठक में नहीं वाले बिजली निगम के एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन सौरभ अहलावत समेत अन्य अनुपस्थित अधिकारियों को नोटिस भेज कर जवाब मांगने को कहा। पार्षदों ने यह आरोप वीरवार को जिमखाना क्लब में आयोजित नगर निगम हाउस की चौथी बैठक में लगाए। पार्षद विक्रम राणा बिजली निगम के कर्मचारी उनके वार्ड में गली में बिजली के पोल लगा रहे थे। जब लोगों के कहने पर उन्होंने पोल लगाने से रोका तो मौके पर मौजूद जेई व बाद में एसडीओ ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की धमकी देते हुए थाने में केस दर्ज कराने की धमकी दी। इस पर सभी पार्षदों ने सर्व सम्मति से बिजली निगम के अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। नगर निगम के अधिकारी सत्ता पक्ष के विधायकों को भी तवज्जो नहीं दे रहे हैं। इससे पार्षदों में रोष देखने को मिला। इससे पहले हुई हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था कि किसी भी कार्य की पेमेंट करने से पहले उस वार्ड के पार्षद से एनओसी ली जाएगी। परंतु अधिकारियों ने बिना एनओसी लिए ही ठेकेदारों के बिल पास कर दिए। पार्षदों ने इस पर एतराज जताया। मेयर सुमन बहमनी ने पार्षदों का समर्थन करते हुए इस पर नाराजगी जताई। मेयर ने कहा कि बिना एनओसी पेमेंट करने वाले स्टाफ पर कार्रवाई होनी चाहिए।
ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग:
पार्षदों ने काम न करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की। पार्षद सात से पार्षद प्रियांक शर्मा ने कहा कि हाउस की बैठक में जो काम पास होते हैं उसका क्या महत्व है? जो काम तुरंत होने थे वह 180 दिन बाद भी शुरू नहीं हुए। ऐसे में पार्षद लोगों के बीच झूठे पड़ रहे हैं। वह पिछली और आज हो रही बैठक के लिए एजेंडा नहीं देना चाहते थे। परंतु जब एजेंडा ही नहीं होगा तो हाउस की बैठक करने का क्या फायदा। काम न करने वाले अधिकारी व कर्मचारी पर क्या कार्रवाई की जाए। एक ठेकेदार के सुपरवाइजर को उन्होंने किसी काम के लिए पांच दिन पहले फोन किया था, परंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। आज बैठक शुरू होने से कुछ देर पहले उनके पास सुपरवाइजर का फोन आया। प्रियांक शर्मा ने तो यहां तक कहा दिया कि पहले पिछली बैठकों में पास हुए काम की लिस्ट उन्हें दी जाए। इसके बाद ही आगे के प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए उन्हें शाम चार बजे तक ही क्यों न बैठना पड़ जाए। पार्षद विक्रम राणा ने कहा कि काम न करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया जाए। वार्ड तीन से पार्षद जयंत स्वामी ने कहा कि जब एक ठेकेदार बार-बार काम नहीं कर रहा तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। सभी की बात सुनकर आयुक्त महाबीर प्रसाद ने कहा कि ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करना समाधान नहीं है। ऐसा करने से ठेकेदार कोर्ट में चला जाएगा। फिर जो काम लटक जाएगा उसका दोबारा नए सिरे से टेंडर करना पड़ेगा। ऐसे में काम शुरू होने में ही करीब एक साल की देरी हो जाएगी।
लाइटों को बताया ऊंट के मुंह में जीरा
पार्षदों ने स्ट्रीट लाइटों के खराब होने व हर वार्ड में दी जा रही 30-30 लाइटों को भी ऊंट के मुंह में जीरा बताया। वार्ड 19 से पार्षद हरजीत आनंद ने कहा कि पार्षदों के कहने से एक लाइट तक नहीं लगती। विष्णु नगर में 20 लाइटें लगी हैं, लेकिन पांच भी नहीं चल रही। यदि पार्षद किसी के कहने पर लाइट लगाने को कहता है तो एसडीओ कहते हैं कि किसी के एमसी के कहने पर लाइट नहीं लगाई जाएगी। मनोनीत पार्षद ऊषा ने कहा कि जो कर्मचारी लाइटें लगाने लगाने आते हैं उनके पास न पोल हाेता है और न ही क्लंप। वार्ड पांच के पार्षद भानू प्रताप ने कहा कि खराब लाइट को 48 घंटे में ठीक करना होता है। 19 सितंबर को शिकायत की गई थी, लेकिन आज तक भी लाइट ठीक नहीं हुई। इसी तरह पार्षदों ने वार्ड से नियमित कूड़ा नहीं उठाने का मामला भी उठाया।
नगर निगम सदन बैठक में एक्सईएन के नहीं आने का कारण बताते एसडीओ अजय अग्रवाल। संवाद