यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग ने ट्रामा सेंटर के नवीनीकरण के लिए अगस्त माह से पहले 47 लाख रुपये पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर किए थे। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने टेंडर लगा ठेकेदार से ट्रामा सेंटर का काम शुरू करवा दिया था। अब तक यह रकम पीडब्ल्यूडी के पास नहीं पहुंची है। जिससे ठेकेदार को भुगतान नहीं हो पाया। पेमेंट न होने से ठेकेदार ने ट्रामा सेंटर का काम बीच में ही रोक दिया। पीडब्ल्यूडी के जेई विजय कुमार का कहना है कि यदि रुपये उन्हें ट्रांसफर हुए होते तो वह ठेकेदार के खाते में जमा करवा देते। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जेई की इस बात को सिरे से नकार रहे हैं।
जिस ठेकेदार को ट्रामा सेंटर के नवीनीकरण का कार्य दिया गया उसे चार माह का समय दिया गया था, जो नवंबर माह में पूरा होगा। ट्रामा सेंटर का भवन अभी ज्यादा पुराना भी नहीं है। इसके बावजूद इसकी छत से बारिश का पानी टपकता था। साथ ही शौचालयों का भी बुरा हाल हो गया था। वहीं 105 करोड़ रुपये से मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल का 200 बेड का नया भवन बनाया गया है। भवन बनाने के साथ ही अस्पताल परिसर में इंटरलॉक टाइलें बिछाई गई हैं। जिससे ट्रामा सेंटर का फर्श बाहर के हिस्से से नीचा हो गया है। जिस कारण इसमें बारिश का पानी भरने का खतरा पैदा हो गया था। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने ट्रामा सेंटर की मरम्मत का एस्टीमेट बनवाया था। पीडब्ल्यूडी ने इस पर 47 लाख रुपये खर्च होने की बात कही थी। वहीं मरम्मत के साथ-साथ ट्रामा सेंटर में आधुनिक फायर सेफ्टी यंत्र भी लगाए जाने हैं। क्योंकि जब इसमें मरीज भर्ती रहते थे तो इसमें दो बार आग लग गई थी। बजट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उक्त राशि पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर करवा दिए थे। टेंडर होने के बाद एजेंसी ने अगस्त माह में काम शुरू कर दिया था। मरम्मत के चलते ट्रामा सेंटर को मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के भवन में शिफ्ट किया गया है।
अब तक पैसा जमा नहीं कराया हैं: विजय कुमार
पीडब्ल्यूडी के जेई विजय कुमार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अभी तक ट्रामा सेंटर के नवीनीकरण का पैसा जमा नहीं कराया गया है। जिस कारण ठेकेदार को पेमेंट नहीं की जा सकी। इसलिए ठेकेदार ने काम को बीच में रोक दिया। ठेकेदार से बात हो गई है जिसे काम शुरू करने को कहा गया है। जल्द ही उसकी पेमेंट शुरू कर दी जाएगी।
सारा पैसा जमा करवा दिया था : पुनीत कालड़ा
स्वास्थ्य विभाग के डीआईओ एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पुनीत कालड़ा का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने जो एस्टीमेट बनाकर दिया था उसका बजट आ गया था। सारा पैसा पीडब्ल्यूडी को उसी समय ट्रांसफर कर दिया गया था। पैसा जमा कराया था तभी तो काम शुरू हुआ था।