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रोजगार से खाली रही झोली, महंगाई पर अंकुश का नहीं रास्ता

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प्रदेश सरकार ने मंगलवार को अपना आम बजट पेश किया। मुख्यमंत्री ने करीब पौने एक घंटे में बजट पेश किया। इस बार के बजट से लोगों को विशेष उम्मीद थीं, जिसके लिए सभी इस दिन का इंतजार कर रहे थे। परंतु आम लोगों ने इस बजट निराशाजनक बताया।
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लोगों का कहना है कि बजट में लोगों को महंगाई, रोजगार व शिक्षा को लेकर काफी आशाएं थीं। परंतु सरकार ने आम बजट में आम आदमी तीन मूल जरूरतों का जिक्र नहीं किया। जिस राहत की लोगों को इस बार जरूरत थी, वह सरकार से नहीं मिल पाई। जिससे लोगों को काफी निराश हुई है। वहीं व्यापारियों को भी इससे काफी निराशा हुई है। व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार की ओर से राज्य कर में राहत देकर उनकी परेशानियों का समाधान किया जाएगा। लेकिन लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया।
युवाओं के लिए यह बजट विशेष महत्व रखता था। कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश में लाखों लोगों का रोजगार चला गया है। युवा डिग्री लेकर बेरोजगार घूम रहे हैं। सरकार से इस बजट में रोजगार के अवसर देने की उम्मीद थी, जो टूट गई। युवाओं के लिए बजट निराशाजनक रहा।
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-शहरवासी गौरव मित्तल।
पहले रोजगार के मामले में हरियाणा अग्रणी श्रेणी में था। दूसरे राज्यों से लोग यहां रोजगार के लिए आते थे। परंतु अब प्रदेश बेरोजगारी में अव्वल हो गया है। लाखों लोग बेरोजगार घूम रहे हैं, परंतु उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। बजट में इसकी आशा भी धराशायी हो गई है। ऐसे में युवा प्रदेश से पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।
-शहरवासी आशीष गुप्ता।
कोरोना संक्रमण के दौर में बाजार व व्यापारियों की हालत खस्ता हो गई है। व्यापारी घाटे में सौदा कर रहे हैं। इस बार सरकार से राहत की उम्मीद थी। परंतु सरकार ने व्यापारियों को निराश किया है। ट्रेड लाइसेंस रद्द करने की घोषणा के बाद इसकी औपचारिकताएं बजट में पूरी नहीं की गई। वहीं अन्य करों में भी राहत का कोई प्रावधान नहीं किया गया। जो बेहद निराशाजनक है।
-महेंद्र मित्तल, प्रदेशाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा।
व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकार इस बार कर में राहत देगी। सरकार का कहना है कि नया कर न लगाना उपलब्धि है। परंतु व्यापारी पहले ही कर के बोझ तले दबा हुआ है। महंगाई पर अंकुश लगाने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। यह मात्र घोषणा बजट रहा। जिससे व्यापारी ही नहीं बल्कि सभी वर्गों को भारी निराशा मिली है।
-संजय मित्तल, व्यापारी।
आम आदमी के लिए बच्चों की शिक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। कोरोना संक्रमण के बाद से यह सभी के लिए और बड़ी हो गई है। निजी व पब्लिक स्कूलों की मनमानी के कारण तमाम लोग परेशान हैं। आम आदमी के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा महंगी है। सरकार को शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की जरूरत थी।
-अधिवक्ता साहब सिंह गुर्जर
इस बजट में लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में काफी उम्मीदें थे। व्यावसायिक व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम करने की आवश्यकता है। इस बार के बजट में इस दिशा में कदम उठाए जाने की अपेक्षाएं निराशा में बदल गई हैं। प्रदेश में अब भी युवा दूसरे राज्यों में शिक्षा के लिए पलायन कर रहे हैं। बजट से विद्यार्थियों व शिक्षा जगत को काफी निराशा हुई है।
सरकार को बजट में शिक्षा ऋण के लिए विशेष राहत की घोषणा करनी चाहिए थी। अभिभावक महंगा ऋण लेकर बच्चों को शिक्षा दिलवा रहे हैं, सरकार को उनका बोझ कम करने की जरूरत है। वहीं तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा के लिए जो प्रावधान की आशा थी वह पूरी नहीं हुई। विद्यार्थियों के लिए इसमें काम नहीं किया गया।
-छात्र भानू प्रताप।
आम बजट महिला दिवस के दिन पेश किया गया। परंतु बजट में महिला शिक्षा को लेकर कोई विशेष योजना नहीं है। यातायात साधन की बात कही गई है, लेकिन धरातल पर यह पूरी नहीं हो पाएगी। चूंकि सरकार पहले भी ऐसी घोषणाएं कर चुकी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं ने कई बार कॉलेज के समय यातायात के साधन लिए प्रदर्शन तक किया गया है। महिला शिक्षा के लिए जो कदम उठाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए।
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-छात्रा शिवी राणा।
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