यमुनानगर शहर में प्रदूषण का स्तर प्रदेश के अन्य जिलों में सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया है। यहां तक की बढ़ते प्रदूषण के लिए बदनाम दिल्ली को भी शहर ने मात दे दी। रविवार सुबह शहर का एक्यूआई 340 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। जबकि दिल्ली का एक्यूूआई 324 माइक्रोग्राम था। प्रदूषण को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। एक तो कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है अब रही सही कसर बढ़ते प्रदूषण ने पूरी कर दी है। कोहरे व प्रदूषण के कारण दृश्यता कम रही। कई जगहों पर तो घने कोहरे में कुछ दूरी पर भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था।
तीन दिनों से जिले में घना कोहरा छाना शुरू हुआ है। इसी के साथ ही प्रदूषण का स्तर दम घोटू स्तर पर पहुंच गया है। गत वर्ष शहर में 18 दिसंबर को एक्यूआई का स्तर 200 व 19 दिसंबर को 153 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। 21 से 26 दिसंबर तक एक्यूआई 312 से 366 माइक्रोग्राम में बीच रहा था। परंतु इस बार तो अभी से ही प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में चला गया है। 250 माइक्रोग्राम के बाद एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में चल जाता है। जिससे सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गला खराब होने जैसे तकलीफ होने लगती है। शहर के बीचोबीच इंडस्ट्रियल एरिया भी है। इनमें ज्यादातर मेटल इंडस्ट्री है। इसमें बहुत बड़े-बड़े बॉयलर हैं जिनसे निकलने वाला धुआं सीधे पर्यावरण पर असर डाल रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी वीरेंद्र पूनिया का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में ट्रैफिक चल रहा है। जिनसे सारा दिन सड़कों किनारे धूल उड़ती रहती है। वहीं अब घना कोहरा भी पड़ने लगा है। जिससे प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। प्रदूषण फैलाने वालों पर बोर्ड नियमानुसार कार्रवाई करता रहता है।
- लोगों द्वारा कूड़े में आग लगाया जाना।
- शहर में चल रही फैक्टरियों में प्रदूषण नियंत्रण करने के उपकरण न होना।
- फैक्टरियों में इंधन के साथ टायर व गन्ने की खोई जलाना।
- शहर के बीच से खनन सामग्री से भरे गुजरने वाले वाहनों से गिरता रेत।
- सड़कों की सफाई के दौरान उड़ती धूल।
- अनफिट वाहनों से निकलने वाला काला धुआं।
दिल्ली 324
यमुनानगर 340
अंबाला 311
बहादुरगढ़ 237बल्लबगढ़ 237
फरीदाबाद 277गुरुग्राम 313
कुरुक्षेत्र 251
करनाल 255
कैथल 275
पंचकूला 231
रोहतक 204
यमुनानगर 340