जगाधरी। धान खरीद के बीच में अनाजमंडी आढ़ती विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने मांगें न माने जाने तक पीछे नहीं हटने की चेतावनी दी है। हड़ताल की रणनीति के अनुसार सोमवार को आढ़ती जिले की सभी मंडियों में हड़ताल के दौरान प्रदर्शन करेंगे। वहीं आढ़तियों ने मंगलवार को शिक्षामंत्री आवास का घेराव की चेतावनी दी हैं।
आढ़तियों ने चेतावनी दी कि यदि इस दौरान सरकार उनकी मांगें मान लेती है, तो हड़ताल रोक दी जाएगी, अन्यथा बुधवार को करनाल अनाज मंडी में सभी आढ़ती एकत्र होंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस दौरान मंडी में खरीद नहीं होगी। अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान शिव कुमार संधाला ने कहा कि वे अपनी मांगें सरकार को बता चुके हैं, इसे लेकर सरकार के निर्णय का इंतजार है। एसोसिएशन की ओर से प्रदेशभर में सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया गया है। जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि आढ़तियों की मुख्य मांग है कि उन्हें कमीशन पूरा दिया जाए। गेहूं का केवल 46 रुपये प्रति क्विंटल के मुताबिक कमीशन दिया गया, जबकि उनका कमीशन 51 रुपये प्रति क्विंटल बनता है। मार्केट फीस भी अधिक बढ़ाई जा रही है। प्रदेश में आढ़तियों पर चार प्रतिशत मार्केट फीस लगाई जा रही है, जबकि दिल्ली और राजस्थान में मार्केट फीस मात्र एक प्रतिशत है। सरकार ई-नेम पोर्टल से आढ़तियों व किसानों के हितों का हनन कर रही है। ई-नेम पोर्टल से जब किसान अनाज लेकर मंडी में पहुंचेगा तो पहले मार्केट कमेटी अनाज की लैब करेगी और उसके बाद पोर्टल पर चढ़ाएगी। इससे खरीद और उठान में देरी होगी और किसानों को भुगतान भी लेट होगा।
यह हैं आढ़तियों की प्रमुख मांगें
-सभी फसलें एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाए। आढ़तियों को पूरी 2.5 प्रतिशत आढ़त मिलनी चाहिए। दो सीजन से गेहूं पर 46 रुपये और धान पर 45.80 रुपये दी गई है। जबकि 51 रुपये बनती है।
-पिछले साल से ही एमएसपी का भुगतान सीधे किसानों को दिया जाने लगा है। इससे आढ़तियों और किसानों में रोष है। सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली सभी फसलों का भुगतान किसान की इच्छा के अनुसार आढ़ती या स्वयं उसके खाते में किया जाना चाहिए।
-मार्केटिंग बोर्ड ने ई-नेम लागू करने के लिए आदेश जारी किए हैं। यह प्रक्रिया प्राइवेट बिकने वाली फसलों पर लागू नहीं हो सकती है। ई-ट्रेडिंग सिर्फ उत्पाद की हो सकती है, जबकि मंडियों में आने वाली फसलें कच्चा माल हैं। इसलिए यह प्रक्रिया मंडियों में लागू न की जाए।
-सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने के बाद भी सरकार ने उनकी फसलें नहीं खरीदी है। जबकि सीमांत किसान प्रदेश बनने के बाद से ही यहां की मंडियों से ही जुड़े हुए हैं। बहुत से किसान प्रदेश के ही रहने वाले हैं। सरकार द्वारा धान न खरीदने के कारण किसानों और आढ़तियों को बहुत नुकसान हुआ है। इससे उनमें भारी रोष है। आगामी सीजन में सभी सीमांत किसानों की फसलों की खरीदी जाए।
-साल 2020 में धान पर मार्केट और एचआरडीएफ फीस चार प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दी थी, लेकिन विभाग ने यह फीस एक प्रतिशत से बढ़ाकर फिर से चार प्रतिशत कर दी है। जबकि पड़ोसी राज्यों में यह फीस बहुत कम है। टैक्स कम होने के कारण व्यापारी दूसरे प्रदेशों से धान खरीद रहे हैं। इससे हरियाणा के किसानों को धान के दाम कम मिल रहे हैं। सरकार फीस घटाकर एक प्रतिशत करे।
-गेहूं सीजन 2020 की जो पेमेंट ब्याज के रूप में आढ़तियों से काटी गई थी, वह मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद आढ़तियों को वापस नहीं की गई है। यह तुरंत दी जाए।