संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। उम्र 62 पार कर रही है, पर जज्बे के आगे कई जवान भी हार मान जाएं। बात हो रही आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. धीरेंद्र सोनी की, जिन्हें लॉकडाउन में साइकिलिंग का चस्का ऐसा लगा कि पांच साल में 98 हजार किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं। 62 की उम्र में साइकिल पर रोज औसत 50 किलोमीटर रास्ता नाप रहे हैं।
वे कई बार एक दिन में अधिकतम 200 किमी तक भी साइकिल चला चुके हैं। ऐसा कर मिसाल बने डॉ. सोनी का मानना है कि शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए साइकिलिंग सबसे बेहतर व सुगम विकल्प है। डीएवी डेंटल कॉलेज में फिजियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सोनी ने बताया कि कोरोना महामारी आई तो लॉकडाउन लग गया। तभी खुद का स्वस्थ रखने के लिए साइकिलिंग शुरू की थी।
तब रोज पांच किमी. भी मुश्किल से साइकिल चला पाते थे। इसमें धीरे-धीरे किमी. बढ़ाते गए, जो अब रोज औसत 50 किमी. तक है। इसके लिए रोज सुबह साढ़े चार से साढ़े सात बजे के बीच दो घंटे तक लगातार साइकिल चलाते हैं। ऐसा करते हुए रोज शहर से बाहर निकल जाते हैं और साढ़े सात बजे घर लौट नौ बजे कॉलेज पहुंच जाते हैं।
इस तरह पांच साल में 98 हजार किमी. साइकिलिंग कर चुके हैं, जिसका रिकॉर्ड मोबाइल ऐप के जरिए रख रहे हैं। जिस दिन कॉलेज से छुट्टी होती है और मौसम भी अनुकूल मिलता है, तब एक दिन में अधिकतम 200 किमी. भी साइकिलिंग कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि साइकिलिंग शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रखती है। एक घंटे तक मध्यम रफ्तार पर साइकिल चलाने पर भी 550 तक कैलोरी बर्न हो सकती है।
इससे हृदय, रक्त वाहिकाओं व फेफड़ों का आसानी से व्यायाम हो जाता है। जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके लिए साइकिलिंग अतिरिक्त फैट को कम करने में काफी मददगार है। इस तरह शरीर तंदुरूस्त रहेगा, जिससे मानसिक स्तर पर भी आप खुद का स्वस्थ महसूस करेंगे। साइकिलिंग करते रोज नए रास्तों पर सुबह प्रकृति के अनोखे नजारे देखने से भी मानसिक स्तर पर मजबूती मिलती है।