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आज मां कात्यायनी की पूजा करने से मिलेगा अभय दान

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यमुनानगर। नवरात्र के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने घरों व प्रतिष्ठानों में मां की प्रतिमा स्थापित कर उनकी आराधना की। वहीं जिले भर के मंदिरों में सुबह शाम संकीर्तन व पूजन किया गया। इस दौरान चौक चौराहों, गली मोहल्लों में जय माता की गूंज सुनाई दी। वहीं वीरवार को छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। मां कात्यायनी दुष्ट दलन करने वाली हैं। इनकी पूजा साधक को अभय दान देती है। महादैत्य महिषासुर का मर्दन करने के कारण मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। मां का यह स्वरूप बहुत करुणामयी माना जाता है, जो उन्होंने भक्तों की तपस्या सफल करने के लिए धारण किया था। मान्यता है कि मां ने महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। कात्यायन की पुत्री होने के कारण उनका नाम कात्यायनी रखा गया।
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पंडित रमन वत्स ने बताया कि मां कात्यायनी का स्वरूप भव्य और अत्यंत चमकीला है। मां कात्यायनी की सवारी सिंह है। उनका ऊपर उठा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है, जबकि दूसरी दाहिनी भुजा वर मुद्रा में है। उनके एक बाए हाथ में तलवार और दूसरे में कमल पुष्प है।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जिनके विवाह में अड़चनें आती है, उन्हें विधि-विधान से मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि मां कात्यायनी की आराधना से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। वहीं मां की अराधना से रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति मिलती है। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के लिए लोगों को मां कात्यायनी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
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ऐसे करें मां की पूजा
पंडित रमन ने बताया कि प्रात: स्नान करें। मां कात्यायनी की पूजा के लिए पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल छिड़काव कर शुद्धि करें। इसके बाद मां की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं और पुष्प चढ़ाएं। मां को पीले फूलों के साथ कच्ची हल्दी की गांठ चढ़ाना भी उत्तम होगा। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा में मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। मां को मधु अर्थात शहद अधिक प्रिय है। इसलिए मां को भोग में शहद का भोग अवश्य लगाएं। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि शहद का भोग लगाने से सुंदर रूप की प्राप्ति होती है।
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