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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का अकाल, वेंटीलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं

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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का अकाल, वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं
अस्पताल बने रेफरल सेंटर, हर पांचवां मरीज किया जाता है रेफर
जिले के 24 सरकारी अस्पतालों में 60 फीसदी पोस्ट खाली
डिप्टी सीएमओ आठ चाहिए, लेकिन एक ही तैनात
-कई सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ सेंटर में डॉक्टर ही नहीं।
सुरेश सैनी
यमुनानगर। जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर आ गई हैं। कारण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी। इसका सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, मरीजों को। इलाज के लिए पीएचसी और सीएचसी से मरीजों को सिविल अस्पताल में रेफर किया जाता है। डॉक्टरों की कमी के चलते यहां से पीजीआई मरीज भेजा जाता है। इस तकलीफ भरे ट्रांसपोर्टेशन के दौरान गंभीर मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। लिहाजा अब लोग प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रूख कर रहे हैं, जो निजी अस्पतालों के महंगे इलाज का बोझ नहीं उठा पाते। उनकी हालत सबसे खराब है।
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60 फीसदी पोस्ट खाली
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अस्पतालों में 60 फीसदी पोस्ट खाली हैं। चिकित्सकों के अभाव में अस्पताल अब केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए। खुद यमुनानगर के सिविल अस्पताल में डिप्टी सीएमओ आठ चाहिए, लेकिन वह भी केवल एक मौजूद है। सबसे ज्यादा बुरा हाल सीएचसी व पीएचसी के हैं। जहां 78 पद खाली पड़े हैं। पदों को भरने के लिए विभाग की तरफ हेड क्वार्टर को छह से अधिक पत्र भेजे जा चुके, परंतु किसी पर भी अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है।
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एक साल की 12 लाख ओपीडी
जिले के 24 छोटे-बड़े अस्पतालों की सालाना 12 लाख की ओपीडी है। अकेले यमुनानगर सिविल अस्पताल की बात करें तो चार लाख सालाना ओपीडी हो रही है। वहीं रोजाना जिला के अस्पतालों में 5000 हजार से अधिक की ओपीडी होती है। लेकिन अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा होने के चलते काफी बड़ी संख्या में मरीजों को चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है।
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हेड क्वार्टर को पत्र भेजे, कोई जवाब नहीं
स्वास्थ्य विभाग में पदों को भरने के लिए सीएमओ की तरफ से हेड क्वार्टर को छह से अधिक डिमांड पत्र भेजे जा चुके हैं, परंतु अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उधर, चिकित्सकों के अभाव में विभाग व मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ताज्जुब की बात है कि हेडक्वार्टर से कोई जवाब भी नहीं दिया गया।
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डॉक्टरों की संख्या का ब्यौरा
पद स्वीकृत पद भरे खाली
डिप्टी सीएमओ 8 1 7
पीएमओ 1 0 1
डिप्टी एमएस 2 2 1
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एसएमओ कैटेगिरी
पद स्वीकृत पद भरे खाली
एमएलसीएच यमुनानगर 5 3 2
सीएच जगाधरी 1 3 0(2 सरप्लस)
सीएचसी मुस्तफाबाद 1 1 0
सीएचसी नाहरपुर 1 0 1
सीएचसी खिजराबाद 1 0 1
सीएचसी रादौर 1 1 0
सीएचसी साढौरा 1 1 0
सीएचसी बिलासपुर 1 0 1
सीएचसी छछरौली 1 0 1
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मेडिकल ऑफिसर(एमओ) कैटेगिरी
पद स्वीकृत पद भरे खाली
सीडी हुडा जगाधरी 1 1 0
एमएलसीएच यमुनानगर 55 17 38
सीएच जगाधरी 8 10 0 (2 सरप्लस)
सीएचसी सरस्वती नगर 7 3 4(1 सरप्लस)
पीएचसी भंभौल 2 1 1
पीएचसी अरनौली 2 0 2(एबसेंट)
सीएचसी नाहरपुर 7 2 5
पीएचसी कलानौर 2 0 2
पीएचसी बाबेपुर 2 2 0
पीएचसी बुडिय़ा 2 2 0
सीएचसी रादौर 7 2 5
पीएचसी अलाहर 2 0 2
पीएचसी अंटावा 2 3 0(1 सरप्लस)
छछरौली 7 5 2
पीएचसी खिजराबाद 7 2 0
पीएचसी खारवन 2 2 0
पीएचसी कोट मुस्तरका 2 1 1
पीएचसी खदरी 2 0 2
सीएचसी साढौरा 7 4 3(1 एबसेंट)
पीएचसी रसूलपुर 2 0 2
बिलासपुर 7 2 5
पीएचसी मुगलवाली 2 1 1
पीएचसी मेहताबपुर 2 1 1
पीएचसी रणजीतपुर 2 0 2
कुल 141 62 76(3 सरप्लस)
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डीएस कैटेगिरी
पद स्वीकृत पद भरे खाली
एमएलसीएच यमुनानगर 3 2 1
अंटावा 1 0 1
मुगलवाली 1 0 1
रंजीतपुर 1 0 1
वर्जन
सरकारी अस्पतालों में स्टॉफ की कमी हैं। पदों को भरने के लिए हेडक्टवार्टर को छह बार डिमांड पत्र भेजे जा चुके हैं। यदि चिकित्सक आ जाएं तो काफी राहत मिलेगी। काफी बड़ी संख्या में मरीजों को रेफर भी करना पड़ता है।-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।
फोटो नंबर 21
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