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धूल के गुबार से प्रदूषण के %खतरनाक% स्तर पर पहुंचा शहर, कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाई

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धूूल के गुबार से प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचा शहर, निगम ने कंस्ट्रक्शन पर लगाई रोक
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। वीरवार की सुबह जब लोग जागे तो शहर के आसमान में धूल का गुबार छाया मिला। दिन भर यह गुबार बना रहा। इसके साथ ही धूल भरी हवाएं भी चलती रहीं। शुक्रवार को भी ऐसे ही धूल भरे मौसम की संभावना है। अगर यही स्थिति लगातार रही तो लोगों का सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। धूल भरी हवाओं के चलते शहर में प्रदूषण का स्तर भी अचानक बढ़ गया। दिनभर पीएम 2.5 की मात्रा 371 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई, जो सामान्य से 6 गुना से भी ज्यादा है। जबकि पीएम 10 की मात्रा 557 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। यह सामान्य से सात गुणा ज्यादा है। वहीं प्रदूषण का लेवल एक बार फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद नगर निगम ने शहर में अगले तीन दिनों तक सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है।
खतरनाक हैं धूल भरी हवाएं : सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. विजय दहिया का कहना है कि हवा में धूल कण होने से सांस के रोगियों को दिक्कत हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ही दमे की समस्या है, उन्हें खास ध्यान रखने की जरूरत है। धूल भरे मौसम के दौरान लोगों को मास्क आदि लगाकर बाहर निकाला चाहिए। धूल के कण नाक के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंच कर कई तरह के इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। धूल भरी हवाएं श्वास के साथ ही आंख को भी बुरी तरह से प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी एवं गले की समस्या भी बढ़ सकती है। सेहत बेहतर रखने के लिए जरूरी है दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और भोजन में विटामिन सी की भरपूर मात्रा शामिल करें।
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उठाने चाहिए ये कदम : कंस्ट्रक्शन साइटों, खाली प्लॉट व सड़कों के किनारे से उड़ रही धूल प्रदूषण में और इजाफा कर रही है। एनजीटी की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसे हालात में सड़कों पर पानी का छिड़काव करना चाहिए। कंस्ट्रक्शन साइटों पर बिल्डिंग मैटीरियल ढंककर रखना चाहिए। सड़कों की सफाई से पहले भी पानी छिड़काव होना चाहिए। निर्माणाधीन मकानों व अन्य साइट पर ग्रीन कवर होना चाहिए। ट्रैफिक जाम लगते ही रूट में बदलाव करना चाहिए, ताकि जाम के चलते हालात न बिगड़ें।
सात साल बाद बने ये हालात : जिले में करीब 7 साल के बाद आसमान में धूल का गुबार छाया है। हवा में उड़ रहे धूल और गर्म हवाओं के दबाव के कारण रात का तापमान भी ज्यादा कम नहीं हुआ। बुधवार की रात करीब 11.30 बजे 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दिन के समय शहर में 41 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था जोकि रात के तापमान से 4 डिग्री ही अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म हवाओं का दबाव ही है जो रात के समय भी गर्मी को बढ़ा रहा है। हवा चली तो दिन के समय बना धूल का गुबार जमीन पर आता दिखाई दिया। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी हुई।
विजिबिलिटी 150 मीटर : दिन में उमस 35 प्रतिशत और दिन के समय विजिबिलिटी 150 मीटर रही। जो रात के समय में यह घटकर 98 मीटर रह गई। विजिबिलिटी कम होने के कारण लोगों को भी वाहन के साथ सड़क पर यात्रा करने में दिक्कतें पेश आईं। धूल के कारण सांस लेना दुश्वार रहा। दमा व एलर्जी के रोगियों को ज्यादा परेशानी हुई। इसके अलावा सड़कों पर दुपहिया वाहन चालकों को भी धूल के कारण दिक्कत हुई। वाहन चालकों को कई जगह दिन में ही लाइट जलानी पड़ी।
नगर निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर अनिल नैन का कहना है कि सफाई के दौरान सभी कर्मचारियों को सावधानी बरतने को कहा गया है। ताकि धूल न उड़े। अगर अधिक दिक्कत होगी तो हम सड़कों के साथ मिट्टी पर पानी का छिड़काव कराएंगे। तीन दिन के लिए सभी तरह का कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पंचकूला रीजनल ऑफिस के एक्सईएन संजीव कुमार ने बताया कि यमुनानगर ही नहीं, पंचकूला और चंडीगढ़ तक धूल दिख रही है। बारिश होते ही ये धूल कण जमीन पर आ जाएंगे और प्रदूषण स्तर भी कम हो जाएगा। राजस्थान से उड़कर आ रही धूल की वजह से प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है।
फोटो नंबर 14, 15
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