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जहां से शुरू, वहीं से मैली हो रही है यमुना, आस्था पर प्रदूषण भारी

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गंगा की तरह पूजनीय फिर भी उपेक्षित यमुना
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- सीधे यमुना नहर में गिर रहे गंदे नाले, अधर में लटकी एसटीपी से जोड़ने की योजना
- नगर निगम व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा अमल में लाई जानी थी योजना
- दो साल बाद भी नहीं हो पाया काम, अब भी नहर में मिल रहा नालों को गंदा पानी
- क्षमता से अधिक दूषित पानी के आगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी दे रहे जवाब
राकेश कुमार
यमुनानगर। गंगा की ही तरह देवी समान पूजनीय यमुना लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रही है। हरियाणा में प्रवेश के पहले ही शहर में यमुना को मैली किया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को साढ़े तीन वर्ष हो चुके हैं, किंतु इससे पश्चिमी यमुना नहर के हालात बदले नहीं हैं। भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यमुना को साफ करने के लिए नमामि गंगे की तर्ज पर बड़ा अभियान शुरू करने की बात कही है, लेकिन अब तक यमुना को स्वच्छ करने के तमाम अभियान फेल साबित हुए हैं। जबकि इस दिशा में नगर निगम, नहरी विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर सकते हैं। आलम ये है कि नहर के किनारों व घाटों पर गंदगी जमा है। वहीं गंदगी युक्त पानी नालों से होकर लगातार नहर में गिर रहा है। हालांकि नगर निगम व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा नालों को ड्रेन के जरिए एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जोड़ने की योजना बनाई थी, किंतु दो साल बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। उधर, नालों से सीधे यमुना में मिल रहे दूषित पानी के कारण बढ़ते प्रदूषण के स्तर से नहर में पल रहे जीवों पर संकट मंडरा रहा है वहीं, तीज-त्योहारों पर यहां पूजन व अन्य रस्मों के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु भी आहत हो रहे हैं।
क्षमता कम होने से तीन एसटीपी भी पड़ रहे कम : यमुना एक्शन प्लान के तहत शहर में तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, लेकिन उनकी क्षमता कम होने से अधिकांश सीवरेज पानी सही से ट्रीट नहीं हो पा रहा और वह सीधे यमुना में गिर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कई बार नोटिस देने पर भी जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग कुछ भी करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। यमुना एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2000 में कैंप के जम्मू कॉलोनी में 25 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, जबकि वर्ष 2002 में 10 एमएलडी का एक प्लांट बाडीमाजरा पुल के पास लगाया गया था। इस प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी और बढ़ाई जा रही है। इसी तरह जमुना गली में पांच एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगा है। मौजूदा समय में तीनों ट्रीटमेंट प्लांटों पर दबाव काफी बढ़ गया है। जम्मू कॉलोनी के प्लांट की क्षमता 25 एमएलडी है, जबकि इस पर 30-35 एमएलडी सीवरेज पानी को साफ करने का बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार बाडीमाजरा पुल के पास लगे प्लांट की क्षमता अभी मात्र 10 एमएलडी ही है, जिसमें मौजूदा समय में 20-22 एमएलडी सीवरेज आ रहा है। यही हालत जमना गली के प्लांट के हैं। क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने से बार-बार एसटीपी जवाब दे जाते हैं। इससे सीवरेज को ट्रीट करने में दिक्कत आ रही है।
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बिना ट्रीट किए यमुना में डाला जा रहा केमिकल युक्त व गंदा पानी : जगाधरी में सैकड़ों फैक्ट्रियों से रोजाना हजारों गैलन केमिकल युक्त व गंदा पानी निकलता है। जो गंदे नालों व सीवरेज के माध्यम से होते हुए सीधे यमुना नहर में गिर रहा है। केमिकल व सड़ा हुआ पानी नहर में गिरने से इसका साफ पानी भी काला हो रहा है। अमादलपुर पुल तक पश्चिमी यमुना नहर में साफ पानी आता है, लेकिन इसके बाद शहर की कॉलोनियों व फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी इस प्रदूषित करता है। शहरी क्षेत्र में दर्जनों नाले इसमें गिरते हैं। जो इसका नीला पानी भी काला पड़ जाता है।
चार साल बाद भी नहीं शुरू हुआ परवालो एसटीपी : मौजूदा समय में जगाधरी शहर का सीवरेज भी यमुनानगर में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में आता है। जगाधरी के सीवरेज को ट्रीट करने के लिए करीब चार वर्ष पूर्व परवालों में एसटीपी लगाकर ट्रीट कर नहर में छोड़ने की योजना बनाई थी। इसके तहत गांव परवालो में 40 एमएलडी का प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण व चाहरदीवारी के बाद निर्धारित बजट का आवंटन न होने से यह कार्य भी काफी समय तक अधर में लटका रहा। हालांकि पिछले डेढ़ साल में इसके निर्माण में काफी तेजी आई है। विभाग की मानें तो परवालो में एसटीपी का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
यमुना में गिर रहा गंदा पानी देख आहत होते है श्रद्धालु : पश्चिमी यमुना नहर की पटरी पर चिट्टा मंदिर के समीप आजाद नगर से निकलते नाले का दूषित पानी नहर में गिर रहा है। इस पर करीब चार वर्ष पहले नहरी विभाग ने आउटलेट लगाया था, किंतु उसमें गंदगी अधिक रुक जाने से गंदा पानी लगती कॉलोनी में घुस जाता है। इससे बचने को आसपास के लोग आउटलेट को ऊपर उठा देते हैं। इस कारण नाले का गंदा पानी कूड़े-कचरे समेत यमुना में गिर रहा है। इसी प्रकार गुरुनानक खालसा कॉलेज से लगती यमुना विहार कॉलोनी से गुजरते नाले का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। सुबह-शाम यह हालात देख यहां स्थित मंदिरों में मथा टेकने समेत यमुना में विभिन्न रस्मों को आने वाले श्रद्धालु आहत हो रहे हैं। गंगा की देवी समान पूजनीय है यमुना, प्रशासन दे स्वच्छता पर ध्यान : यमुना मईया बचाओ समिति के प्रदेश सचिव संजय कुमार मित्तल ने कहा कि यमुना गंगा की तरह देवी समान पूजनीय है। पश्चिमी यमुना नहर के तट व घाटों पर हजारों लोग धार्मिक अनुष्ठान व अन्य रस्मों हेतु पहुंचते हैं। इसमें श्रद्धालु यमुना किनारे व घाटों पर पूजन के साथ यमुना के जल से आचमन व स्नान करते हैं। ऐसे में नहर का स्वच्छ होना जरूरी है। समिति द्वारा कई बार प्रशासन से मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई है। प्रशासन को चाहिए कि समय रहते यमुना की स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए।
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एसटीपी की क्षमता बढ़ाने का प्रयास जारी है। बाड़ीमाजरा एसटीपी में क्षमता 10 से बढ़ाकर 20 एमएलडी की जाएगी। जल्द ही परवालो एसटीपी भी शुरू किया जाएगा। दशमेश कॉलोनी के पास थी पंपिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यमुना में सीधे गिर रहे नालों का पानी इसमें डाला जाएगा। इससे यमुना में सीधे नाले गिरने की दिक्कत जल्द ही दूर हो जाएगी। - गौरव कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियंत्रिकी विभाग।
फोटो : 08 से 11
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