पुतला फूंक बोले किसान- मर चुकी है सरकार की संवेदना, इसलिए किया अंतिम संस्कार
गांव बंद आंदोलन के अंतिम दिन किसानों ने शहर में निकाला रोष मार्च, महाराणा प्रताप चौक पर फूंका पुतला
बोले, दस दिन की हड़ताल के बाद भी नहीं जागी सरकार,
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। भारतीय किसान महासंघ के आह्वान पर चल रही हड़ताल के अंतिम दिन किसानों ने शहर में रोष मार्च निकालकर बाजार बंद करवाया। हालांकि किसानों के जाने के बाद दुकानदारों ने फिर से दुकानें खोल दी। रोष मार्च के बाद किसानों ने महाराणा प्रताप चौक पर जाकर प्रधानमंत्री का पुतला फूंका। भाकियू नेताओं का कहना था कि उनकी दस दिन की हड़ताल के बाद भी भाजपा सरकार नहीं जागी और उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार की संवेदनाएं मर चुकी है। इसलिए उन्होंने मरी हुई सरकार का अंतिम संस्कार किया है।
भारतीय किसान महासंघ के गांव बंद आंदोलन के समापन पर रविवार सुबह भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सुढल व जिला प्रधान संजू गुंदयाना के नेतृत्व में सैकड़ों किसान जगाधरी अनाज मंडी गेट पर एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जगाधरी अनाज मंडी गेट से किसान कारों व बाइक पर सवार होकर रोष मार्च निकालते हुए जगाधरी बस स्टैंड, मटका चौक, अग्रसेन चौक, प्यारा चौक, शहीद भगत सिंह चौक (फव्वारा चौक) से होते हुए महाराणा प्रताप चौक (कमानी चौक) पर पहुंचे। इस दौरान किसानों ने दुकानदारों से अपील करते हुए रेलवे रोड, जगाधरी बाजार, जगाधरी वर्कशॉप रोड स्थित बाजारों की दुकानें बंद करवाई। कमानी चौक पहुंचकर किसानों ने प्रधानमंत्री का पुतला जलाया। भाकियू प्रदेश सचिव हरपाल सिंह का कहना था कि चार साल सरकार को बने हुए हो गए, लेकिन आज तक किसानों की मांगे पूरी नहीं की गई। किसानों ने दस दिवसीय हड़ताल की, लेकिन फिर भी सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। इससे लग रहा है कि बीजेपी सरकार किसानों के लिए मर चुकी है। इसी लिए किसानों ने सरकार को मरा हुआ मानकर उनका अंतिम संस्कार किया। प्रदर्शन में बाबूराम, कृष्ण पाल, गुरमुख सिंह, कश्मीरी लाल, राजकुमार, महेंद्र सिंह, राजेंद्र, विक्रम, ईश्वर, संदीप, धर्मपाल, मनदीप रोड छप्पर, राजेश आदि मौजूद थे।
किसान जीवित तो बाजार जीवित : किसान नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान दुकानदार भाइयों से दुकानें बंद करने की अपील की, क्योंकि अगर किसान जीवित रहेगा तो बाजार जीवित रहेगा। दुकानदारों का भी फर्ज बनता है कि वह किसानों के आंदोलन का समर्थन करें। क्योंकि वह भी किसान के द्वारा पैदा किया हुआ अनाज खाते हैं।
15 जून को तैयार की जाएगी आगामी आंदोलन की रूपरेखा : भाकियू नेता हरपाल ने बताया कि राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर देश भर में एक जून से 10 जून तक गांव बन्द आंदोलन शुरू किया, लेकिन सरकार किसानों से बातचीत करने को तैयार नहीं है। उन्होंने शांतिपूर्वक अपना रोष जताया, लेकिन अब भी सरकार नहीं मानी, तो वह एक बड़ा आंदोलन देश भर में खड़ा करेंगे। आगामी 15 जून को कुरुक्षेत्र जाट धर्मशाला में होने वाली प्रदेश स्तरीय मीटिंग में इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
ये है किसानों की मांगे : किसानों ने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले किसानों से वादा किया था कि वह किसानों के कर्ज माफ करेंगे, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करेंगे, लेकिन सत्ता में आने के बाद यह वादे सरकार भूल चुकी है। इसलिए उन्हें मजबूरन आंदोलन का सहारा लेना पड़ा। किसानों की तीन मुख्य मांगे हैं कि किसानों के कर्ज माफ किए जाए, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए और फसल का लागत मूल्य दिया जाए। इन्हीं तीन मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहा है।
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