यमुनानगर। वैसे तो हर दिन प्राचीन सिद्ध पीठ श्री देवी मंदिर में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में इसकी महत्ता कहीं अधिक बढ़ जाती है। इसका कारण मंदिर में पिछले 58 वर्षों से जल रही माता की अखंड ज्योति है, जिसके दर्शन करने के लिए जिला ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
मान्यता है कि हर साल नवरात्र में मां किसी न किसी श्रद्धालु को दर्शन देने के लिए यहां आती है। यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ श्री देवी मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच कर पिछले 58 वर्ष से जल रही मां की 11 अखंड ज्योति के दर्शन कर रहे हैं। वहीं शनिवार को चैत्र नवरात्रों की माता शैलपुत्री के प्रथम नवरात्र से शुरूआत हो रही है। नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के मंदिर सज चुके हैं और मंदिरों के बाहर नवरात्रों का सामान खरीदने के लिए भी दुकानें सज चुकी हैं। लोग उत्साह से माता की चुनरी और नारियल खरीद रहे हैं।
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132 वर्ष पहले हुआ था मंदिर निर्माण
श्री देवी मंदिर का निर्माण करीब 132 वर्ष पहले जगाधरी के लाला श्याम लाल ने करवाया था। उस समय मंदिर स्थल पर सुनसान जंगल था और यमुनानगर को अब्दुल्लापुर के नाम से जाना जाता था। बताते हैं कि मंदिर के निर्माण से पहले एक दिन मां ने लाला श्याम लाल के स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण के लिए आशीर्वाद दिया था। इसके बाद लाला श्याम लाल ने अब्दुल्लापुर में माता बाला सुंदरी के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।
मां ने दिए थे दर्शन
श्रद्धालुओं के मुताबिक करीब 58 वर्ष पहले मंदिर के पुजारी पंडित जीवानंद ने विश्वशांति की कामना को लेकर मंदिर में मां की अखंड ज्योति प्रज्जवलित की थी, जो आज तक जल रही है। बुजुर्गों का कहना है कि ज्योति प्रज्जवलित के समय पं.जीवानंद को मां ने कन्या रुप में साक्षात दर्शन दिए थे। मंदिर के वर्तमान पुजारी ने बताया कि जो श्रद्धालु मंदिर में सच्चे मन से मन्नत मांगता है तो मां उसकी हर मुराद पूरी करती है। खास बात यह है कि नवरात्र के दौरान मां अपने भक्तों को कन्या के रुप में दर्शन भी देती हैं।