कुरुक्षेत्र की डीएसडब्ल्यू बिल्डिंग में एक नहीं बल्कि आधा दर्जन विभाग हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था किस कदर केयू में लाचार है इसका नमूना यहां लगेे अग्निशमन यंत्राें को देखकर लगाया जा सकता है।
इस बिल्डिंग में बने विभाग और कार्यालयों के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों में आग पर काबू पाने के लिए सामर्थ्य नहीं है। अगर यहां आगजनी की कोई घटना हो जाती है तो उस स्थिति में क्या होगा और जो अग्निशमन यंत्र यहां लगाए गए हैं वेे केवल मात्र दिखावे के लिए लगाए गए हैं।
अमर उजाला ने पहले भी परीक्षा भवन में खस्ता हालत में लगे अग्निशमन यंत्रों की खबर कुछ दिनों पहले ही प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
केयू डीएसडब्ल्यू बिल्डिंग के एमसीए विभाग, कंप्यूटर सेंटर, डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स ऑफिस, पीआरओ ऑफिस, आईटी सेल, प्रोटक्टर रूम, बिजली कंट्रोल रूम, सेनेटरी विभाग और सिक्योरिटी रूम के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों पर लिखी तिथि के अनुसार यंत्र अब एक्सपायर हो चुके हैं।
ज्यादातर अधिकारियों ने यही जवाब दिया कि यह निर्माण शाखा का कार्य है। उधर, निर्माण शाखा के अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है, क्योंकि एक महीने पहले ही अग्निशमन यंत्रों को रिफिल करवाया गया है।
सूचना अधिकारी को नहीं सूचना
केयू सूचना अधिकारी को अपने कार्यालय की सूचना नहीं है। डीएसडब्ल्यू बिल्डिंग स्थित सूचना अधिकारी के कार्यालय के बाहर लगा अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायरी डेट का लगा हुआ है। तो जिस विभाग का कार्य अन्य विभागों में लोगों को विभिन्न गतिविधियों व सूचनाओं को सुचारु करने का काम है उसी कार्यालय के बाहर एक्सपायरी डेट का लगा अग्निशमन यंत्र अधिकारियों को लापरवाही दर्शाता है। वहीं पीआरओ दविंदर सचदेवा ने भी जानकारी न होने की बात कही।
निर्माण शाखा का है काम
सेनेटरी अधिकारी राजबीर से जब उनके कार्यालय के बाहर लगे एक्सपायरी अग्निशमन यंत्र लगे होने पर जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि यह काम उनका नहीं बल्कि निर्माण शाखा का है और आपको इस विषय में सही जवाब निर्माण शाखा के अधिकारी ही दे सकते हैं।
संबंधित विभाग से लें जानकारी
एकेडमी अफेयर्स डीन गिरीश चोपड़ा ने कहा कि अग्निशमन यंत्र की जानकारी उन्हें नहीं है और संबंधित विभाग से इस विषय में जानकारी दे सकता है। उन्होंने भी एक्सपायरी अग्निशमन यंत्र उनके कार्यालय के बाहर लगे होने की जानकारी नहीं होने की बात कही।
समय-समय पर होनी चाहिए टेस्टिंग
फायर ब्रिगेड ऑफिसर कृष्ण चंद के अनुसार अग्निशमन यंत्र की एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद उसे तुरंत रिफिल करवाना चाहिए। यह संबंधित कंपनी या फिर विभाग की ड्यूटी है कि वह समय पर ऑडिट और टेस्टिंग कर यंत्रों को दोबारा से रिफिल करवाएं। उन्होंने माना कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में इस तरह की लापरवाही गलत है।
रिफिल करवाए जाएंगे अग्निशमन यंत्र
निर्माण शाखा के एक्सईएन पृथ्वी सिंह सैनी से जब इस विषय में बात की गई कि उनकी ओर से समय-समय पर ऑडिट और टेक्निकल जांच नहीं की जाती तो उन्होंने कहा कि जांच तो होती है। परंतु पूरी बिल्डिंग में लगे अग्निशमन यंत्रों को एक्सपायर देखकर तो यही लगता है कि ऑडिट केवल कागजों में ही होती है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की ओर से एक महीने पहले अग्निशमन यंत्रों के रिफिल करवाने के ऑर्डर करवाए गए थे और यदि कुछ अग्निशमन यंत्र रिफिल नहीं हुए है तो उन्हें दोबारा से रिफिल करवाया जाएगा।
संज्ञान लेने की बात कही
कुलसचिव डा. कृष्ण चंद रल्हाण को जब इस बारे में जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी और वे इसका संज्ञान संबंधित अधिकारियाें से लेेंगे।