कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ डील के तहत खरीदी गई जमीन का डीएलएफ के नाम का इंतकाल (म्युटेशन) रद्द करने का खमियाजा अब सीनियर आईएएस अशोक खेमका को भुगतना पड़ेगा।
मुख्य सचिव पीके चौधरी ने खेमका को चार्जशीट करने का प्रस्ताव तैयार किया था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
खेमका ने न केवल म्युटेशन रद्द किया था बल्कि मीडिया में भी उसे प्रचारित किया था। आखिर में तो खेमका ने मुख्य सचिव को भेजे अपने जवाब में आरोप लगाया था कि सीएलयू देने के नाम पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
इस आरोप से खफा होकर सरकार ने खेमका पर कार्रवाई करने का फैसला किया है। अब उनकी चार्जशीट तैयार होगी। जिसे मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद ही खेमका को चार्जशीट जारी होगी।
अमर उजाला ने सबसे पहले खुलासा किया था कि खेमका को चार्जशीट किया जाएगा। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने अमर उजाला के पूछने पर पुष्टि की कि खेमका को चार्जशीट करने का फैसला हो गया है।
चार्जशीट में ये लगाए जा सकते हैं आरोप
म्युटेशन रद्द करने के लिए खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया।
साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का घोटाले का आरोप लगाकर प्रदेश सरकार की नीति का सार्वजनिक विरोध किया।
तबादला 11 अक्तूबर को हुआ मगर चार्ज 15 अक्तूबर को छोड़ा।
चार्ज छोड़ने से पहले खेमका ने 15 अक्तूबर को म्युटेशन रद्द किया और उससे दो दिन पहले 12 अक्तूबर को पलवल, फरीदाबाद, गुड़गांव, मेवात के उपायुक्तों से वाड्रा या उनकी कंपनियों के नाम खरीद-फरोख्त की गई जमीन का रिकार्ड तलब किया।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। लाइसेंस रिन्यू करने और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
चैनलों में बहस के दौरान भाग लिया और अपने आदेश को सही ठहराते हुए सरकार की आलोचना की। इसके लिए सरकार से अनुमति नहीं ली।
खेमका का यह हो सकता है चार्जशीट पर पलटवार
चार्जशीट के आरोपों का जवाब देने से पहले वे सरकार से सभी सीएलयू की सूची मांग सकते हैं। वाड्रा-डीएलएफ डील के तहत खरीदी और बेची गई जमीन के दस्तावेज, कंपनी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कई कंपनियों का रिकार्ड मांग सकते हैं।
जिस अफसर ने 15 अक्तूबर को चार्ज छोड़ा, उस अफसर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कितने ऐसे अफसर हैं जिन्होंने तबादले के बाद चार्ज कई दिन तक नहीं छोड़ा।
चार्जशीट के कारण वाड्रा-डीएलएफ डील मामला हाईकोर्ट में पहुंच सकता है।
वाड्रा के समर्थन में प्रमुख विपक्षी दल खासकर इनेलो, भाजपा मुहिम छेड़ सकते हैं।