शहर में 1996 में हुए बम धमाकों के आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा ने
आखिरकार पुलिस के सामने कबूल कर ही लिया कि उसने ही अपने साथियों इमरान और
शकील को धमाके करने के लिए भेजा था।
दिल्ली से प्राडक्शन वारंट पर
सोनीपत लाई हरियाणा पुलिस ने टूंडा को अदालत से एक दिन के रिमांड पर लेकर
पूछताछ की थी। टूंडा ने जिन दो साथियों के नाम बताए हैं, पुलिस उन दोनों को
पहले ही पकड़ चुकी है। टूंडा के इस कबूलनामे से 17 साल बाद सोनीपत बम
धमाकों का मामला सुलझता दिखाई दे रहा है।
टुंडा ने हरियाणा पुलिस को
बताया कि उसके साले की मौत के बाद वह जेहाद से जुड़ा और उसने देश भर में
आतंकी वारदातों को अंजाम दिया। टुंडा को रिमांड अवधि खत्म होने पर रविवार
को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पानीपत पुलिस प्रोडक्शन वारंट
पर अपने साथ ले गई।
दिल्ली पुलिस द्वारा 17 अगस्त को गिरफ्तार
किए गए अब्दुल करीम टुंडा ने 28 दिसंबर 1996 को सोनीपत में बस स्टैंड के
पास स्थित तराना सिनेमा और गीता भवन चौक स्थित गुलशन मिष्ठान भंडार के पास
विस्फोट करवाए थे। इस मामले में इंद्रा कालोनी सोनीपत निवासी सज्जन सिंह के
बयान पर मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में अशोक नगर पिलखुआ
(गाजियाबाद) निवासी शकील पुत्र सुलेमान और अनार वाली गली, तेलीवाड़ा दिल्ली
निवासी मोहम्मद अमीर उर्फ इमरान खान पुत्र मोहम्मद हफीज को 1998 में
गिरफ्तार कर लिया था। सीआईए पुलिस ने शनिवार को टुंडा को दिल्ली से
प्रोडक्शन वारंट पर लिया था।
टुंडा ने रिमांड अवधि में
अपने गुर्गों द्वारा सोनीपत में धमाके करवाना स्वीकार किया है। पुलिस ने
आरोपी को रिमांड अवधि के बाद रविवार को अदालत में पेश किया, जहां से उसे
पानीपत पुलिस ने 1997 में हुए समझौता एक्सप्रेस बम कांड के मामले में
प्रोडक्शन वारंट पर लिया है।
- बलबीर सिंह, डीएसपी सिटी, सोनीपत