पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सभी सरकारों को पूरी तरह से फेल करार दिया।
वे शुक्रवार को हरियाणा के रेवाड़ी के मीरपुर गांव में हवलदार जगमाल सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए आए हुए थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में अभी तक की सभी सरकार उदासीन रही है। सच यह है कि इस विषय के बारे में सरकार जानती ही नहीं है। सुरक्षा बाहरी ही नहीं देश के अंदर भी करनी होती है।
नक्सलवादियों के संबंध में उन्होंने कहा कि विकास न होने पर आदमी अधिकार की बात करता है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का सम्मान नहीं होता है।
1947 के बाद देश में सैनिकों का कोई राष्ट्रीय स्मारक नहीं बना है। दिल्ली का इंडिया गेट भी आजादी से पहले बना था।
जगमाल को शहीद का दर्जा दिलाने का करेंगे प्रयास
वीके सिंह ने शहीद जगमाल सिंह के परिजनों को आश्वासन दिया कि वह ईएमई के डीजी से बात कर उनके परिवार को शहीद को मिलने वाला हर लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने परिजनों के प्रदेश के मुख्यमंत्री से आर्थिक मदद दिलाने में सहायता करने का अनुरोध करने पर कहा कि सीएम को जो ज्ञापन भेजें, उसकी प्रति मुझे दें।
उसको अपने सिफारशी पत्र के साथ भेजेंगे। 1968 में विमान दुर्घटना के बाद जगमाल सिंह का शव बर्फ के नीचे दब गया था, जो 45 साल बाद मिला।
इस मौके पर सूबेदार रामचंद्र, सूबेदार ईश्वर सिंह, हेडमास्टर उदयराज, रामकिशन नंबरदार मीरपुर, मानेसर के पूर्व सरपंच गजराज, रवि यादव मानेसर, विनोद पाली और कप्तान रघुबीर सिंह आदि मौजूद थे।
अन्ना को बताकर ही जाएंगे भाजपा की रैली में
रेवाड़ी/भिवानी। नरेंद्र मोदी की 15 सितंबर को हो रही रेवाड़ी रैली के संबंध में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि अभी तक रैली का निमंत्रण नहीं मिला है।
निमंत्रण मिलने पर अन्ना और पूर्व सैनिक समुदाय से बात करने के बाद निर्णय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रैली में आने को पार्टी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
वहीं, भिवानी में प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु ने दावा किया कि रेवाड़ी रैली में वीके सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि आएंगे। उनके अलावा इस रैली में करीब 10 पूर्व जनरल रैंक के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
फौजी वोट बैंक बनेंगे तो मिलेगा सम्मान
वीके सिंह ने कहा कि अभी तक फौजी की पोस्टल बैलेट तक पहचान थी, अब अगर फौजियों को वोट बैंक बनाया जाएगा तो निश्चय ही उनका
सम्मान होगा। इससे उन्हें कुछ लाभ भी मिलेगा। वन रैंक वन पेंशन के विषय में उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान बाबुओं में फंसा हुआ है।