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Tokyo Olympic 2021: 19 साल की अंशु को कड़ी मेहनत से मिला मुकाम, अब पिता के सपने को पूरा करने की आस

Sat, 24 Jul 2021 08:06 PM IST
निवेदिता वर्मा धर्मबीर निडाना, अमर उजाला, जींद (हरियाणा) 

सार

अंशु मलिक के पिता बताते हैं कि 2016-17 में अंशु ने जूनियर वर्ग में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था। राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सरकार द्वारा नकद पुरस्कार दिया जाता था। लेकिन सात साल पहले नई सरकार आने पर यह पुरस्कार बंद कर दिया गया।
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अंशु मलिक। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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विश्व के सबसे बड़े खेल आयोजन ओलंपिक में जींद के निडानी गांव की बेटी पहलवान अंशु मलिक 57 किलोग्राम भार वर्ग में अपनी प्रतिभा दिखाएंगी। अंशु मलिक का ओलंपिक के लिए चयन होने के बाद भले ही हर किसी की नजर उन पर टिकी हैं, लेकिन अंशु ओलंपिक के लिए ऐसे ही तैयार नहीं हुई। छह साल कड़ी मेहनत के बाद यह मौका मिला है। आज अंशु मलिक का नाम हर किसी की जुबान पर है, लेकिन कठिन दौर में सरकार से कोई भी मदद नहीं मिलना अंशु मलिक के पिता धर्मवीर मलिक को साल रहा है।

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धर्मवीर मलिक के अनुसार उन्होंने हर सुख सुविधा को छोड़कर सिर्फ बेटी के खेल पर ध्यान दिया। अब 19 साल की उम्र में अंशु ओलंपिक में भाग लेगी। उसने महज 13 साल की उम्र में कुश्ती शुरू कर दी थी। इसी साल अप्रैल में हुए ट्रायल में अंशु मलिक ने ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया था। कुछ दिन पहले ही सरकार से पांच लाख रुपये की मदद मिली है। हालांकि धर्मवीर मलिक का कहना है कि उनकी बेटी को जब मदद की जरूरत थी, तब सरकार ने नहीं की।

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सरकार ने साढ़े आठ लाख रुपये पर मारी कुंडली

अंशु मलिक के पिता बताते हैं कि 2016-17 में अंशु ने जूनियर वर्ग में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था। राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सरकार द्वारा नकद पुरस्कार दिया जाता था। लेकिन सात साल पहले नई सरकार आने पर यह पुरस्कार बंद कर दिया गया। अंशु को साढ़े आठ लाख रुपये मिलने चाहिए थे पर नहीं मिले। इससे खिलाड़ियों पर अभिभावकों को काफी परेशानी हो रही है। 

धर्मबीर मलिक बताते हैं कि वह छह एकड़ के किसान हैं और सिर्फ खेती के सहारे बच्चों को पहलवान बनाना बहुत मुश्किल है। अब सिर्फ दूध-घी से काम नहीं चलता। अच्छा प्रशिक्षण, माहौल व बाहर जाने के लिए बच्चे पर करीब एक लाख रुपये महीना खर्च होते हैं। सरकार ने समय पर कोई मदद नहीं की।

देश के लिए पदक जीतना ही लक्ष्य
ओलंपिक के लिए चयन होना एक सपने के साकार होने के बराबर है। हालांकि ओलंपिक पिछली साल ही होना था। लेकिन कोरोना के चलते यह नहीं हो सका। ऐसे में कोराना काल का पूरा इस्तेमाल करते हुए अभ्यास किया। इसके चलते ही यह मौका आया है। - अंशु मलिक, पहलवान।

पिता भी रहे हैं अंतरराष्ट्रीय पहलवान
धर्मवीर मलिक खुद अंतरराष्ट्रीय पहलवान रहे हैं। उनके चाचा भी अंतरराष्ट्रीय पहलवान रहे हैं। अंशु का छोटा भाई भी पहलवानी करता है।

2016 वाले पैसे अभी नहीं मिले हैं। पहले विभाग ने मना कर दिया था। लेकिन बाद में पैसे देने की बात कही है। अब केस विभाग को भेजा गया है। जैसे ही ऊपर से राशि आती है दे दी जाएगी। - राजबाला दहिया, जिला खेल अधिकारी, जींद।

अंशु मलिक की अब तक उपलब्धियां
  • एथेंस में 4 से 10 सितंबर 2017 तक आयोजित विश्व कैडिट चैंपियनशिप में स्वर्ण
  • आगरा में 7 से 15 मई 2017 तक आयोजित विश्व खेल स्कूल चैंपियनशिप में स्वर्ण
  • थाईलैंड में 20 से 23 जुलाई 2017 तक आयोजित एशिया कैडिट कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
  • 2016 में ताइवान में आयोजित एशिया कैडिट कुश्ती चैंपियनशिप में रजत
  • 2016 में जार्जिया में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
  • 10 से 13 मई 2018 को एशियन सब जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण
  • 18 से 23 सितंबर तक तरनाया में आयोजित विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य
  • 3 से 8 जुलाई 2018 को आयोजित विश्व सब जूनियर (कैडिट) चैंपियनशिप में कांस्य
  • 15 से 18 फरवरी 2020 को रोम में आयोजित विश्व रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप में रजत
  • 18 से 20 फरवरी 2020 को दिल्ली में आयोजित सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य
  • 12 से 18 दिसंबर तक बेलग्रेड में आयोजित सीनियर वर्ल्ड कप रेसलिंग चैंपियनशिप में रजत पदक।
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