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खेल: राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने पर पहलवान व प्रशिक्षक नाखुश, बताया कुश्ती को नुकसान पहुंचाने की साजिश

Wed, 13 Apr 2022 10:59 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

पहलवान व प्रशिक्षक बोले कि कुश्ती को नुकसान पहुंचाने की साजिश है। कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों में दोबारा शामिल कराने के लिए लड़ाई लड़ेंगे। राष्ट्रमंडल खेलों ने कई पहलवानों को बुलंदी दिलाई है। सरकार व भारतीय कुश्ती संघ को इसे लेकर तुरंत ठोस पहल करनी चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अब देश के पहलवान वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में दांव नहीं लगा पाएंगे। कुश्ती को ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य के विभिन्न शहरों में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर कर दिया गया है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के इस फैसले से सोनीपत के पहलवान व प्रशिक्षक नाखुश हैं। उन्होंने एक सुर में महासंघ के इस फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इसका असर कुश्ती पर पड़ेगा। भारत कुश्ती में बड़ी शक्ति है। इसे राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करने से कुश्ती का नुकसान होगा और देश में इसकी लोकप्रियता कम होगी।

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सोनीपत के पहलवानों व प्रशिक्षकों को जब वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती को बाहर किए जाने का पता लगा तो उन्होंने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताने के साथ नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कह दिया कि कुश्ती के साथ साजिश की जा रही है। भारत कुश्ती में सिरमौर बन चुका है। ऐसे में साजिश के तहत भारत को पदक तालिका में नीचे रखने के लिए इसे बाहर किए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कुश्ती संघ को इसे लेकर कठोर फैसला लेना चाहिए। जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों का बहिष्कार तक करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार व खेल मंत्रालय से गुजारिश की है इन खेलों में कुश्ती की वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जाए।  राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने घोषणा करते हुए कुश्ती, निशानेबाजी व तीरंदाजी को बाहर कर दिया है। कुश्ती के बाहर होने के कारण पहलवानों को बड़ा झटका लगा है। पहलवानों ने कुश्ती बाहर किए जाने का विरोध जताया है।
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राष्ट्रमंडल में भारत अकेले कुश्ती में जीत चुका 102 पदक 
राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में भारत का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। हर बार भारत के पहलवान कुश्ती में कई पदक देश की झोली में डालते हैं। वर्ष 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने पांच स्वर्ण सहित 12 पदक जीते थे। इतना ही नहीं स्कॉटलैंड के ग्लासगो में वर्ष 2014 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत ने पांच स्वर्ण, छह रजत व दो कांस्य समेत 13 पदक जीते थे। वहीं वर्ष 2010 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पहलवानों ने 8 स्वर्ण सहित 17 पदक जीते थे। अब तक भारत राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में कुल 43 स्वर्ण, 37 रजत व 22 कांस्य समेत 102 पदक जीत चुका है। 

कुश्ती का हटाया जाना भारत के खिलाफ

मेरा मानना है कि राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को हटाया जाना भारत के खिलाफ है। कुश्ती के क्षेत्र में सोनीपत अपनी अलग पहचान बना चुका है। राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे पहलवानों का कोई सानी नहीं है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने कुश्ती को बाहर करने का फैसला लेकर पहलवानों को निराश किया है। सरकार से मांग है कि जल्दी ही कुश्ती को वापस राष्ट्रमंडल में शामिल कराने के लिए बेहतर पहल करें।  -कुलदीप मलिक, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक।


सबसे अधिक नुकसान भारत को

कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से हटाए जाने का सबसे अधिक नुकसान भारत को ही होगा। अगर कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर रखा जाता है तो यह पहलवानों के लिए काला दिन होगा। अब भारतीय पहलवान कुश्ती में काफी पदक जीत रहे हैं। भारत को इसका विरोध करना चाहिए और इसमें सभी पहलवान पूरा सहयोग करेंगे।  -राज सिंह छिक्कारा, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रशिक्षक। 


भारतीय कुश्ती संघ ले कड़ा संज्ञान

कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से निकाले जाने की जानकारी ने काफी आहत किया है। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ही एक ऐसा देश है जो सभी 20 भार वर्गों में पदक जीतने को चुनौती देता है। भारतीय कुश्ती संघ को इसे लेकर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। खेल संघ कुश्ती को वापस राष्ट्रमंडल खेल का हिस्सा बनवाएं और साथ ही इसे निकाले जाने के निर्णय की जांच कराई जाए।  -ओमप्रकाश दहिया, द्रोणाचार्य अवॉर्डी।


पहलवानों और प्रशिक्षकों को एकजुट होना होगा

मेरे लिए यह बेहद हैरान कर देने वाला फैसला है। वर्ष 2002 में भी राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर किया गया था, लेकिन बाद में विरोध किए जाने पर कुश्ती को फिर से शामिल किया गया। पहले की तरह सभी पहलवानों व प्रशिक्षकों को एकजुट होना होगा। भारत सरकार व खेल मंत्रालय से उम्मीद है कि वह पहलवानों के साथ नाइंसाफी नहीं होने देंगे। कुश्ती की वापसी के लिए सरकार को हर मंच पर जोरदार ढंग से पैरवी करनी चाहिए। -योगेश्वर दत्त, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता। 


पहलवानों का टूटेगा मनोबल

कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर किए जाने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। कुश्ती ने सदैव तिरंगे का मान बढ़ाया है। पुरुष ही नहीं, महिला पहलवान भी कुश्ती में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में कुश्ती को बाहर करने से पहलवानों का मनोबल टूटेगा। देश के लाखों युवाओं को निराशा होगी।  -बजरंग पूनिया, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता। 


सरकार आगे आकर पहलवानों का मनोबल टूटने से बचाए

कुश्ती देश का मान है। पहलवान लगातार कुश्ती में पदक जीतकर देशवासियों का सीना चौड़ा कर रहे हैं। कुश्ती को बाहर करने की बात सोचना भी गलत है। राष्ट्रमंडल संघ को इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए और सरकार को भी आगे आकर पहलवानों का मनोबल टूटने से बचाना चाहिए। ओलंपिक खेलों की तैयारी पर भी इसका असर पड़ेगा। -अनिल खत्री, राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता।

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