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सुशील को स्टार बनने में लगे 15 साल, अपराधी बन सलाखों के पीछे 18 दिन में पहुंचा

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सोनीपत। देश के लिए ओलंपिक में दो मेडल जीतकर स्टार बनने में पहलवान सुशील कुमार को 15 साल लगे, लेकिन वह केवल 18 दिन में अपराधी बनकर सलाखों के पीछे पहुंच गया। जहां एक समय कुश्ती उसके सहारे ऊंचाईयों तक पहुंची थी, वहीं अब सुशील के कारण ही कुश्ती पर दाग लग गया है। सुशील को पहलवान कुछ दिन पहले तक अपना आदर्श मानकर ओलंपिक मेडल का सपने देखते थे। उनकी नजरों में सुशील अब अपराधी बन चुका है।
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सुशील कुमार ने 14 साल की उम्र में 1997 में अखाड़े में कदम रखा था। इसके बाद सुशील कुमार ने 2003 में लंदन में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण व उसी साल दिल्ली में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता तो वह चर्चा में आने शुरू हो गए थे। उसके बाद सुशील कुमार पीछे नहीं रुके और सुशील लगातार पदक जीतकर आगे बढ़ते रहे। सुशील ने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता तो वह कुश्ती के लिए एक बड़ा दिन था और सुशील कुमार को बड़ी पहचान उस पदक से मिली थी। सुशील कुमार ने 2010 में देश को कुश्ती का विश्व विजेता भी बनाया। लेकिन देश में कुश्ती के लिए सबसे बड़ा दिन वह रहा, जब 2012 में लंदन ओलंपिक में सुशील कुमार ने रजत पदक जीत लिया। ओलंपिक में दूसरा पदक जीतकर सुशील कुमार देश के स्टार बन गए, क्योंकि वह देश के ऐसे खिलाड़ी बन गए थे, जिसने ओलंपिक में दो पदक जीते हो। सुशील कुमार कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में छह पदक, एशियन चैंपियनशिप में चार पदक, कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन, एशियन गेम्स में एक, वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक व ओलंपिक में दो मेडल जीत चुके हैं। इस तरह से सुशील को देश का स्टार बनने में 15 साल लग गए थे और युवा पहलवान उनको अपना आदर्श मानकर कुश्ती खेलने को अखाड़े में कदम रखने लगे। लेकिन 4 मई की रात छत्रसाल स्टेडियम में अपने ही शिष्य पहलवान सागर धनखड़ की हत्या में सुशील कुमार का नाम आया तो सुशील कुमार अपराधी बना गया। इससे जहां गुरु व शिष्य के रिश्ते पर कलंक लग गया, वहीं कुश्ती पर भी यह बड़ा दाग है। इस तरह 18 दिन पहले तक कुश्ती का स्टार सुशील कुमार अब सलाखों के पीछे पहुंच गया है।
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