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स्वामी दयानंद के वेदों की ओर लौटने के आह्वान को करना होगा स्वीकार : आर्य

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आध्यात्मिक सत्संग सुधा कार्यक्रम में प्रवचन सुनते श्रद्धालु व विद्यार्थी। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। संसार की समस्त समस्याओं का समाधान वेद मार्ग के अनुशरण से है। वैदिक ज्ञान से भ्रमित होने पर ही वेदना झेलनी पड़ती है। संसार के देशों को स्वामी दयानंद के वेदों की ओर लौटने के आह्वान को स्वीकार करना होगा।उसके अलावा विश्वशांति का दूसरा मार्ग संभव ही नहीं है। यह बातें यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य जयेंद्र आर्य ने आर्य समाज, मॉडल टाउन में आयोजित आध्यात्मिक सत्संग सुधा एवं वेद प्रचार सप्ताह के छठे दिन श्रद्घालुओं को संबोधित करते हुए कहीं।
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आचार्य जयेंद्र आर्य ने कहा कि वेदों का ज्ञान ईश्वरीय है। उसको सृष्टि के आरंभ में चार ऋषियों के माध्यम से प्रतिपादित किया गया है। यह जीव मात्र के कल्याण के लिए जीवन जीने का विधान है। इसका पालन किए बिना न तो विश्व में शांति हो सकती है और न ही जीवन में सुख व आनंद की अनुभूति होगी। भजनोपदेशक भानुप्रकाश शास्त्री ने कहा कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र व व्यवहार है। कभी जाति व रूप-रंग के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। आचार्य सतन देव सत्यम ने कहा कि महर्षि दयानंद ने लिखा है कि पूजा, आराधना केवल सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक व निराकार परमेश्वर की ही करनी योग्य है, वहीं आराध्य हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जुन देव दुरेजा व मंच संचालन हरिचंद स्नेही ने किया। इस मौके पर मास्टर फतेह सिंह, नरेश सहगल, राज गुलाटी आर्य, गीता सहगल, दीपा आर्य, महेश जुनेजा, नरेश सहगल, सुनील सचदेवा, विनोद सहगल, जवाहर बत्रा, सुरेंद्र खुराना व वीरेंद्र अरोड़ा मौजूद रहे।
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