जिले में कोरोना का कहर अचानक बढ़ा और मरीजों की हालत ज्यादा खराब होने लगी तो मेडिकल कॉलेज समेत अस्पतालों में बेड भर गए। जिससे नए मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी गई थी और मरीज बेड नहीं मिलने से तड़प रहे थे तो उनकी मौत तक हो रही थी। अब कोरोना का कहर कुछ कम होने से अस्पतालों में बेड खाली हो गए हैं। जिससे मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में नए मरीज भर्ती करने पर लगी रोक को हटा लिया गया है। इस तरह अब नए मरीजों को मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में आईसीयू व वेंटिलेटर वाले बेड मिलने में कोई परेशानी नहीं होगी।
जिले में कोरोना का कहर इतना बढ़ गया था कि यहां 1100 से ज्यादा तक मरीज मिल रहे थे और गंभीर हालत में मरीज पहुंच रहे थे। जिससे उनको भर्ती कराने के लिए परिजन मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में लेकर पहुंचने लगे। मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में शुरुआत में मरीजों को भर्ती किया गया, लेकिन उसके बाद बेड खाली नहीं रहे और मरीजों के लिए परेशानी खड़ी होने लगी। यहां दस दिन पहले तक यह हालात थे कि मेडिकल कॉलेज व अन्य अस्पतालों में बेड खाली नहीं होने से हालात बिगड़ गए और नए मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी गई थी। अब कोरोना का कहर कुछ कम होने पर हालात धीरे-धीरे सुधरने लगे हैं तो जिले का रिकवरी रेट भी बढ़कर 85 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज व अन्य अस्पतालों में बेड खाली होने से नए मरीजों को भर्ती करने पर लगाई गई रोक को हटा दिया गया है।
डीसी श्यामलाल पूनिया के अनुसार बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में कोरोना मरीजों के लिए 500 बेड्स की व्यवस्था की गई है, जिसमें आईसीयू में 210 आक्सीजन बेड व 90 नॉन ऑक्सीजन बेड्स के अलावा 50 वेंटिलेटर बेड शामिल है। इसके अलावा आईसीयू से अलग भी 160 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है। डीसी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आईसीयू में बिना ऑक्सीजन वाले 90 बेड में 82 खाली है तो आईसीयू में ही 210 ऑक्सीजन बेड में 96 खाली है। उन्होंने बताया कि आईसीयू से अलग 160 ऑक्सीजन बेड में कोई भी खाली नहीं है। वहीं अब वेंटिलेटर भी खाली हो गए हैं और वहां 50 वेंटिलेटर बेड में 6 खाली हैं। डीसी ने बताया कि सिविल अस्पताल व प्राइवेट अस्पतालों के अंदर भी ऑक्सीजन बेड खाली हैं और अब मरीज को भर्ती करने को लेकर कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।