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कचरा मुक्त हुआ गंगेसर, कमाई भी होने लगी

Thu, 11 May 2017 11:16 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत
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गांव में कूड़ा प्रबंधन स्थल पर ठोस कचरे को अलग करता सफाई कर्मचारी। - फोटो : amarujala beuro
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एक तरफ जहां शहरों में सफाई पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं गंगेसर गांव की पंचायत को एक महिला ने सफाई के लिए मिसाल बना दिया है। गांव को पूरी तरह से कचरा मुक्त कर दिया गया है, वहीं कचरे से कमाई भी शुरू हो गई है। यहां कूड़े के लिए अलग से शेड बनाई गई है, जहां कूड़ा डालने के बाद उससे ठोस कचरा अलग करके बेचा जाता है। उससे मिलने वाला रुपया पंचायत की कमाई में जुड़ जाता है। वहीं, गांव की हर गली पक्की कर दी गई है तो हर नाली पर जाली लगी हुई। गांव के गंदे पानी का ऐसा प्रबंधन किया गया है कि हर कोई देखकर चौंक जाए। पानी साफ करने के लिए फाइव पोंड सिस्टम बनाया गया है और उससे साफ होने वाला पानी खेतों में इस्तेमाल होता है, जबकि उसके पास ही शहरों से भी अच्छा पार्क बनाया गया है, जहां गांव के लोग सुबह-शाम घूमने जाते हैं।
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पढ़ी-लिखी पंचायत का दिखा असर
पहली बार पंचायतों में पढ़े-लिखे सरपंच व पंच आए तो उसका असर भी गांवों के विकास के साथ दिखाई देने लगा है। वह नए-नए विकास मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसा ही विकास का एक मॉडल प्रस्तुत किया गया है मुंडलाना ब्लॉक के गांव गंगेसर की पंचायत ने। 28 साल की युवा सरपंच बबली ने पंचों के साथ मिलकर कुछ ही समय में गांव की तस्वीर बदल डाली। करीब 2000 की आबादी वाला गांव एक साल पहले तक काफी पिछड़ा हुआ माना जाता था, लेकिन अब इस गांव को देखने के लिए अधिकारी व लोग दूर-दूर से आते हैं क्योंकि यह गांव प्रदेश के सबसे सुंदर गांवों में शामिल हो चुका है।
ऐसे बनी योजना
सरपंच बबली देवी ने गांव के पंचों को बुलाकर विकास का खाका तैयार किया। गांव की दो सबसे बड़ी समस्याएं थी। एक गांव में एकत्र होने वाला कूड़ा व दूसरा गंदे पानी की निकासी का प्रबंध। पंचायत ने सबसे पहले गांव में कूड़ा प्रबंधन के लिए एक शेड तैयार कराई। उसके साथ ही पंचायत ने विभाग के अधिकारियों के सहयोग से पानी को साफ करने के लिए फाइव पोंड सिस्टम बनाने का काम शुरू हो गया।
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कचरे से कमाई के साथ बनती है खाद
गांव में जिस कूड़े को गली में डाल दिया जाता था और उससे गंदगी बढ़ रही थी अब उस कूड़े को सफाई कर्मियों के सहारे रोजाना शेड में इकट्ठा किया जाने लगा। उसके लिए सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई कि वह उस कूड़े से रोजाना प्लास्टिक, लोहे व अन्य ऐसे सामान को अलग करेंगे, जिसको बेचा जा सकता हो। रोजाना ठोस कचरा अलग कर दिया जाता है और ऐसे कचरे को इकट्ठा कर दिया जाता है, जिससे खाद बन सकती है। प्लास्टिक, शीशे, लोहे के ठोस कचरे को बेच दिया जाता है, जिससे आने वाला रुपया पंचायत में जमा करा दिया जाता है। इससे चंद दिनों में भले ही ज्यादा रुपये न आए, लेकिन 500-1000 रुपये तक पंचायत के पास चले जाते है। वहीं बाकी बचे कचरे को ऐसी जगह भेज दिया जाता है, जहां खाद बनाई जाती है, लेकिन अब पंचायत जल्द ही अपने यहां कचरे से खाद बनाने की मशीन लगाने वाली है।
पानी निकासी को बनाया फाइव पोंड सिस्टम
वहीं, गंदे पानी की समस्या दूर करने के लिए पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर मात्र चार महीने में ही फाइव पोंड सिस्टम बना दिया गया। इससे गांव से निकलने वाले गंदे पानी को उस फाइव पोंड सिस्टम के सहारे इकट्ठा किया जाने लगा और उसे साफ किया जाता है। हाल ही में लिए गए पानी के सैंपल में पहले तालाब का बीओडी 136 और पांचवें तालाब का बीओडी मात्र 36 पाया गया। अब इस पांचवें तालाब के पानी से पूरे गांव के खेतों की सिंचाई होती है। इस तरह पंचायत ने पानी भी साफ कर दिया और उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी की समस्या भी दूर हो गई।
पार्क विकसित कर गांव को दिया शहर का लुक
इन पांचों तालाबों के पास ही पौधरोपण के साथ-साथ सैर करने के लिए ट्रैक तैयार किए गए हैं। इसके अलावा बैठने के बेंच व छतरी भी लगाई गई है तो पार्क में घास व फुलवारी भी लगाई गई है। इस पार्क को शहरों के पार्क से काफी बेहतर बनाया गया है। यहां ग्रामीण सुबह-शाम सैर के लिए पहुंचते हैं। लोगों का कहना है यहां हुए विकास कार्यों को देखने के लिए अधिकारी ही नहीं दूर-दूर केे गांव के लोग भी पहुंच रहे हैं।
पक्की गलियां और नालियां ढकी हुईं
गंगेसर गांव की पंचायत ने शुरुआती दौर में गांव की सभी गलियों को पक्का करवाया और नालियों का निर्माण कर उन्हें लोहे की जालियों और सीमेंट के स्लैब से ढकवाया गया। सभी नालियों का कनेक्शन पांच तालाब श्रेणी वाले तालाब में किया गया है। नालियों की सफाई के लिए नियमित तौर पर व्यवस्था की गई और निगरानी के लिए जिम्मेदारी तय की गई।

गांव में शहर से भी बेहतर सुविधाएं मिलें तो शहर में जाने का क्या फायदा। वहां सब कुछ महंगा मिलता है। गांव में पार्क, पीने के पानी की व्यवस्था और सफाई व्यवस्था बेहतर मिल रही है। इन्हीं सुविधाओं के लिए ही गांव के लोग शहर की तरफ भागते हैं।
फोटो 07 -  कविता, गंगेसर

जिस तरह पढ़ी-लिखी पंचायत ने गांव का विकास करके दिखाया है, वह गांव के लोगों के लिए किसी सपने से कम नहीं है। गांव में जहां जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते थे, वहीं आज पेड़-पौधे, खुशबूदार फूल गांव की गलियों को महका रहे हैं।
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