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बिजली बिल भरवाने गई टीम का छिछड़ाना के ग्रामीणों ने किया विरोध

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कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर वाहन गुजरने के दौरान उड़ती धूल। संवाद - फोटो : Sonipat
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कुंडली-सिंघु बॉर्डर से किसानों की घर वापसी के बाद नेशनल हाईवे (एनएच) 44 खुलने से वाहन चालकों को राहत मिली है, लेकिन अब उनके सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। बॉर्डर पर लगातार उड़ रही धूल वाहन चालकों को परेशान कर रही है। धूल के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। फिलहाल बॉर्डर पर केवल तीन लेन ही खोली गई हैं, जिनसे दोनों ओर छोटे वाहनों को ही आवागमन की इजाजत है, जबकि भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ही गुजारा जा रहा है। लोगों ने धूल व लगातार बन रही जाम की स्थिति छुटकारा दिलाने की मांग की है।
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कुंडली-सिंघु बॉर्डर से 11 दिसंबर को किसानों की वापसी के बाद एनएच-44 पर रास्ता खोलने की कवायद शुरू हो गई थी। बढ़ते प्रदूषण के प्रतिबंध लगाए जाने के कारण केवल गड्ढे भरने व सड़क पर पत्थर व मिट्टी डालकर समतल करने का ही काम किया गया था। 15 दिसंबर को शाम के समय से छोटे वाहनों के लिए बॉर्डर पर तीन लेन खोल दी गई थीं। ट्रैफिक बेहद धीमा है। इन सबके बीच अब सड़क से उड़ने वाली धूल वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। लगातार धूल उड़ने से कई बार दिखाई भी नहीं देता, जिससे हादसा होने की आशंका रहती है। हालांकि, प्रशासन ने कई बार यहां पानी का छिड़काव करवाया है, लेकिन वाहनों की लगातार बढ़ती भीड़ के कारण फिर से असामान्य हालात हो जाते हैं।
यह बोले राहगीर
कुंडली-सिंघु बॉर्डर से रास्ता खुलने से काफी बड़ी राहत मिली है। लगातार हो रही परेशानी दूर हुई है। अब धूल उड़ने से दिक्कत होने लगी है। जब तक निर्माण कार्य नहीं होता, तब तक पानी का छिड़काव कराया जाना चाहिए।
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- राजू कुमार, राहगीर
कुंडली बॉर्डर खुलने से काफी राहत मिली है। अब समय पर घर वापसी हो सकेगी। इससे पहले काफी घूमकर जाना पड़ता था। अब प्रशासन से गुहार है कि यहां लगने वाले जाम को लेकर भी कदम उठाए जाएं, जिससे लोगों को मुसीबत से बचाया जा सके।
- सुमित, राहगीर
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कुंडली बॉर्डर खुलने से जो राहत मिली है, उसे बयां नहीं किया जा सकता। हर रोज रात को दस बजे घर पहुंचता था। अब समय पर घर जा पाऊंगा। थोड़ी धूल व जाम की समस्या है। प्रशासन को जल्द इसे भी दूर कर देना चाहिए।
- विजय कुमार, राहगीर
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वर्जन
एनजीटी ने फिलहाल निर्माण कार्यों पर रोक लगा रखी है, जिसके कारण केवल मिट्टी व पत्थरों से गड्ढों को भरा गया है। ऐसे में धूल उड़ना लाजिमी है। उम्मीद की जा रही है कि निर्माण कार्यों से शीघ्र ही प्रतिबंध हट जाएगा, जिसके बाद यहां सड़क पर तारकोल की लेयर बिछाई जाएगी। इसके बाद धूल से निजात मिल सकेगी। फिलहाल पानी का छिड़काव कर राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
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- आनंद दहिया, डीजीएम, एनएचएआई
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