सोनीपत। घर में सुख शांति और समृद्धि के लिए श्रद्धालु मंगलवार को वरद चतुर्थी व्रत रखेंगे। भगवान श्री गणेश को समर्पित वरद चतुर्थी व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। सोमवार को श्रद्धालुओं ने व्रत को लेकर अपनी तैयारी पूरी की। माघ महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वरद, विनायक व तिलकुंद चतुर्थी कहा जाता है। माघ माह के वरद चतुर्थी व्रत में भगवान श्री गणेश व चंद्रमा की पूजा की जाती है।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि माघ माह की वरद चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान है। मान्यता है कि वरद चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का अवतरण हुआ था। उन्होंने बताया कि वरद चतुर्थी के दिन जो भक्त सच्ची श्रद्धा से भगवान श्रीगणेश की पूजा-उपासना विधि विधान से करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही जीवन में आ रहे दुख और क्लेश से छुटकारा मिलता है। वरद चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश के मंत्रों का जाप करने से दुखहरता भगवान श्री गणेश अपने भक्तों के संकटों का हरण कर लेते हैं।
वरद चतुर्थी का महत्व
पंडित अमित शाैनक ने बताया कि हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान श्री गणेश जी को पूजा जाता हैं। वरद चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश जी की पूजा विधिविधान से करने पर आर्थिक स्थिति में सुधार आता व सभी कष्ट दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन जो व्रती दान पुण्य या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करता है उसे व्रत का दोगुना लाभ होता है।
वरद चतुर्थी का मुहूर्त
वरद चतुर्थी का प्रारंभ : 12 फरवरी, शाम 5:44 बजे से
वरद चतुर्थी का समापन : 13 फरवरी, दोपहर 2:41 बजे
पूजा का मुहूर्त : 13 फरवरी, सुबह 11:29 से दोपहर 1:42 बजे तक