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सोनीपत में अनोखा प्रदर्शन: सरकार से की ग्रांट मुहैया करवाने की मांग, घोड़े पर सवार होकर आए जिला पार्षद

Wed, 23 Oct 2024 12:09 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

सोनीपत में जिला पार्षदों ने कहा कि उन्हें भत्ता के नाम पर भी भेदभाव किया जा रहा है। नगर निगम को 15 से 20 रुपये भत्ता मुहैया करवाया जा रहा है, जबकि उन्हें मात्र 6 हजार रुपये ही भत्ता दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जिला पार्षदाें की ओर से मांग पत्र सौंपा गया है।
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प्रदर्शन करते पार्षद - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सोनीपत में जिला पार्षदाें ने एकत्रित होकर नगर निगम पार्षदाें की तर्ज पर कार्य करने की शक्ति व उन्हें ग्रांट मुहैया करवाने की मांग को लेकर घोड़े पर बैठकर रोष मार्च निकाला। जिला पार्षद संजय बड़वासनी घोड़े पर बैठ सिर पर गठड़ी रखकर अन्य जिला पार्षदों के साथ रोष जताते हुए पुलिस लाइन से अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचे।

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संजय बड़वासनी ने कहा कि सिर पर गठड़ी रखने का मतलब यह है कि सभी जिला पार्षदों पर करीब 18-18 गांवों के विकास कार्यों का बोझ है। उन्हें इन गांवों में विकास के लिए सांसद व विधायक की तर्ज पर वर्ष में एक बार कोटा दिया जाए, ताकि वह गांवाें में विकास कार्य करवा सकें। विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से बहुत कम ग्रांट दी जा रही है।

उनकी केंद्र व राज्य सरकार से मांग है कि प्रत्येक पार्षद का ग्रांट के अतिरिक्त एक करोड़ रुपये मुहैया करवाया जाए, ताकि वह विकास कार्य करवा सकें। आज नगर परिषद के पार्षद के पास 15 हजार, जिला पार्षद के पास वार्ड की 55 से 60 हजार वोट है, जबकि नगर निगम पार्षद 70 से 80 करोड़ रुपये प्रति वर्ष लगा रहा है। वहीं जिला पार्षद की ओर से दो वर्ष में 40 से 45 लाख रुपये ही लगाए जा रहे हैं। सरकार ने जिला पार्षदों के हाथ बांधने का काम किया है। ऐसे में वह विकास कार्य करवाने में संपन्न नहीं हैं। 
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भत्ता देने में भी किया जा रहा है भेदभाव
जिला पार्षदों ने कहा कि उन्हें भत्ता के नाम पर भी भेदभाव किया जा रहा है। नगर निगम को 15 से 20 रुपये भत्ता मुहैया करवाया जा रहा है, जबकि उन्हें मात्र 6 हजार रुपये ही भत्ता दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जिला पार्षदाें की ओर से मांग पत्र सौंपा गया है। सरकार उनके मांग पत्र पर विचार कर मांगों को पूरा करे, ताकि वह भी अपने क्षेत्रों में विकास कार्य करवा सकें। उनकी मांगों पर सुनवाई की जाए, अन्यथा वह अलग-अलग ढंग से अपना रोष प्रदर्शन जारी रखेंगे।
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अपने ही सम्मान की लड़ाई लड़ रहे जिला पार्षद
जिला पार्षदों ने कहा कि उन्हें आज अपना सम्मान बचाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है। जब सरपंचाें को ग्रांट के साथ 20-21 लाख के विकास कार्य करवाने की छूट दी गई है तो जिला पार्षदों को न्याय दिया जाए। गांवों में जाने पर उनसे विकास कार्यों को लेकर सवाल किए जाते हैं। उनकी मांग है कि उन्हें भी नगर निगम पार्षदों की तरह ग्रांट मुहैया करवाई जाए, ताकि वह विकास कार्यों को गति प्रदान कर सकें।

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