संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। अंडर-23 के विश्व विजेता बनकर अल्बानिया से लौटे गांव जुआं निवासी पहलवान चिराग छिक्कारा का दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वागत किया गया। चिराग ने अल्बानिया की राजधानी तिराना में 21 से 27 अक्तूबर तक आयोजित प्रतियोगिता के 57 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। चिराग का ढोल नगाड़े के साथ फूल व रुपये की माला पहनाकर स्वागत किया गया।
वीरेंद्र छिक्कारा ने बताया कि उनके भतीजे चिराग का विश्व विजेता बनने का सफर संघर्ष से भरा है। वह चिराग को वर्ष 2016 में जबरदस्ती गांव स्थित अखाड़ा में लेकर गए थे। इसके बाद चिराग ने प्रशिक्षक संजीत पहलवान से गुर सीखना शुरू किया। वर्ष 2018 में पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने बताया कि अखाड़ा में अभ्यास के दौरान भतीजे की पसली टूट गई थी। इसकी वजह से कई महीने तक उसे अभ्यास से दूर रहना पड़ा था। इस वर्ष जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान घुटने में चोट लग गई थी। डॉक्टर ने कहा था कि चिराग का खेलना मुश्किल है, लेकिन चिराग ने हार नहीं मानी। वह कड़ी मेहनत व अभ्यास के बाद करीब छह माह में ही मैट पर लौटे और अब विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया।
चिराग के पिता दिनेश छिक्कारा ने बताया कि बेटे ने विश्व स्तर पर सोना जीतकर देश, प्रदेश व गांव का नाम रोशन किया है। विश्व विजेता बनने पर परिवार में जश्न का माहौल है। चिराग गांव रायपुर स्थित अखाड़ा में अभ्यास करते हैं। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में चिराग ने किर्गिस्तान के पहलवान अब्दिमलिक काराचोव को 4-3 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। चिराग छिक्कारा ने कहा कि विश्व कुश्ती में पदक जीतना तो केवल शुरुआत है। मेरा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। दिल्ली स्थित हवाई अड्डे पर सीनियर विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करने वाले गांव के ही पहलवान अंकित गुलिया का भी फूलमाला पहना स्वागत किया गया।
चिराग को नेवी के प्रशिक्षक कुलदीप सिंह, साई के प्रशिक्षक बलवंत छिक्कारा, रेलवे के प्रशिक्षक राजबीर छिक्कारा, प्रशिक्षक सुरेंद्र, वायु सेना प्रशिक्षक डालमिया वीरेंद्र छिक्कारा ने बधाई दी।