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Sonipat News: हस्त नक्षत्र के साथ बन रहे तीन शुभ संयोग, कालसर्प दोष से मिलेगा छुटकारा

Thu, 08 Aug 2024 11:02 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 9 अगस्त को नाग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। नाग देवता को पंचमी तिथि का स्वामी माना गया है। इस दिन भगवान शिव-माता पार्वती के साथ नाग देवता की पूजा-अर्चना व व्रत करने से जन्म कुंडली में कालसर्प दोष से छुटकारा मिलता है, साथ ही भय दूर होता है। नाग पंचमी पर हस्त नक्षत्र शुभ संयोग के साथ तीन योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है।
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चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष शुक्रवार को नाग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। नाग पंचमी पर हस्त नक्षत्र के दुर्लभ शुभ संयोग के साथ शिव वास, साध्य योग व सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान शंकर के साथ नाग देवता की पूजा शीघ्र फलदायी मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष शांत हो जाता है। मनुष्य सर्प दंश के भय से मुक्त हो जाता है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा से आध्यात्मिक शक्ति, मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव-माता पार्वती साधक की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। कुंडली में कालसर्प दोष व राहु दोष होने पर रुद्राभिषेक करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
इस बार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 9 अगस्त को सूर्योदय से लेकर 10 अगस्त प्रात: 3:00 बजे तक रहेगी। इस दिन तीन पहर में शुभ मुहूर्त रहेंगे। सुबह 5:47 से 8:27 बजे, दोपहर 12:13 से 1:00 बजे और शाम 6:33 से 8:20 बजे तक पूजा-अर्चना के लिए विशेष मुहूर्त रहेगा। इन तीन पहर में भगवान शिव-माता पार्वती व नाग देवता की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी रहेगा।
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यह करें उपाय
-नाग पंचमी पर सुबह स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
-घर के मुख्य द्वार, मंदिर या रसोई के दरवाजे के दोनों तरफ पुताई कर नाग देवता का चिह्न बनाएं।
-नाग देवता की पूजा-अर्चना व फूल, फल, धूप, दीप, कच्चा दूध अर्पित कर आरती करें।
-अगर नाग देवता को दूध पिलाना संभव न हो तो एकांत स्थान पर रख देना चाहिए।
-इस दिन सर्प दिख जाए तो दूर से प्रणाम कर रास्ता बदल लेना चाहिए।
-कुंडली में काल सर्प दोष होने पर चांदी के सर्प का जोड़ा नदी में प्रवाहित करें।
-तांबे का सर्प शिव मंदिर में चढ़ाना व रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी रहेगा।
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