गन्नौर। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर पानीपत के गांव सिवाह में शुक्रवार को सड़क हादसे का शिकार हुए मां-बेटा की मौत से गांव उदेशीपुर में मातम पसरा हुआ है। हादसे का शिकार हुए संदीप परिवार के इकलौते चिराग थे। पिता का साया बचपन में ही सिर से उठ गया था। गरीबी के थपेड़े झेलते हुए मां ने अपने बच्चों का आर्थिक तंगी मुश्किल से लालन-पालन किया था। मां-बेटे की मौत से परिवार में बुढ़ी दादी व शादीशुदा बहन रह गई हैं। जिनका हादसे के बाद से रो-रोकर बुरा हाल है।
गांव उदेशीपुर निवासी सन्नी ने बताया कि उनका चचेरा भाई संदीप (21) अपनी मां मुकेश (44) के साथ अपनी मौसी से मिलने पानीपत के गांव सिवाह जा रहा था। वह जब सिवाह के निकट पानीपत पुलिस लाइन के सामने पहुंचे तो पीछे से आ रहे ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। उन्होंने बताया कि संदीप जब तीन साल था, तब उनके पिता की मौत हो गई थी। मां ने मुश्किल से अपनी बेटी व बेटे का लालन-पालन किया था। मां व भाई की मौत के बाद से बहन डिंपी सदमे में है। उसका रो-रो कर बुरा हाल है। परिवार ने बहुत ही गरीबी में जीवन बिताया। अब संदीप परिवार का सहारा बना था, पूरा परिवार उस पर ही निर्भर था। इसलिए उसने पढ़ाई के साथ होटल में नौकरी भी शुरू की थी। वह सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा रहता था। हादसे के बाद से दादी भी बदहवास हो गई है। उनका कहना है कि पहले बेटा खोया, अब बहु व पोते को भी छीन लिया। मैं जीकर क्या करूंगी, इससे अच्छा था कि भगवान मुझे ही उठा लेता।
होटल में झूलों पर नौकरी करता था संदीप
संदीप परिवार का इकलौता चिराग था। वह बीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। परिवार के भरण पोषण के लिए वह जीटी रोड पर भिगान चौक पर होटल के बाहर लगे झूलों को चलाने की नौकरी करता था। मृतक संदीप के पिता धर्मेंद्र की भी 18 साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। संदीप की बड़ी बहन डिंपी शादीशुदा है। संदीप की 90 वर्षीय दादी चलने व सुनने में असमर्थ है।
फोटो 27- संदीप का फाइल फोटो।