सोनीपत। पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और प्रदूषण पर काबू पाने के उद्देश्य से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम लगातार जिले का दौरा कर रही है। रविवार को बोर्ड के वैज्ञानिक एफ. रहमान के नेतृत्व में टीम ने झुंडपुर गांव का दौरा किया। इस दौरान टीम ने कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) पर उपलब्ध आधुनिक कृषि यंत्रों का रिकॉर्ड खंगाला और खेतों में जाकर पराली के गांठ बनाने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर साल पराली जलाने की घटनाएं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कृषि विभाग किसानों को नवीनतम कृषि उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध करवा रहा है। साथ ही गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के फायदे समझाए जा रहे हैं। कृषि विभाग और जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी का असर इस वर्ष साफ दिख रहा है।
वर्ष 2023 में 5 अक्तूबर तक 17 लोकेशन पर आगजनी दर्ज की गई थी। 2024 में यह आंकड़ा घटकर 8 लोकेशन रह गया। इस बार केवल एक लोकेशन सैटेलाइट से दर्ज हुई है, वह भी खेत में नहीं बल्कि पास की एक फैक्टरी में आग लगने की वजह से आई। इसे फर्जी लोकेशन की श्रेणी में डाला गया है।
जिला स्तर पर विशेष टीमों का गठन कर किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। आधुनिक यंत्रों की उपलब्धता और निगरानी तंत्र के चलते पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। आधुनिक कृषि यंत्र भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। रविवार को केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों ने झुंडपुर गांव का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा है।
- डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत