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एक-दूसरे से जुड़ेंगे प्रदेश के तीनों तकनीकी विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय, ई-मेल से पुस्तकों का होगा आदान-प्रदान

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मुरथल विवि में पुस्तकालयाध्यक्षों के साथ प्रेजेंटेशन देखते वीसी प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत। - फोटो : Sonipat
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प्रदेश के तीनों विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय एक-दूसरे से जुड़ेंगे। एक ई-मेल आईडी के माध्यम से पुस्तकों और जर्नल का आदान-प्रदान होगा, जिससे विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक अपने विवि की लाइब्रेरी में बैठकर ही दूसरे विवि की पुस्तकों का अध्ययन कर सकेंगे। अभी मुरथल विवि के विद्यार्थी को जीजेयू हिसार या वाईएमसीए फरीदाबाद की लाइब्रेरी की किसी पुस्तक और जर्नल का अध्ययन करना हो तो उसे संबंधित विश्वविद्यालय में ही जाना पड़ेगा। यह स्थिति दूसरे विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ भी है, लेकिन अब विद्यार्थियों को दूसरे विवि में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि मुरथल, जीजेयू हिसार और वाईएमसीए फरीदाबाद ने मिलकर एक योजना बनाई है, जिससे तीनों विवि के पुस्तकालय एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे और पुस्तकों व जर्नल का ई-मेल के माध्यम से आदान-प्रदान करेंगे।
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प्रदेश के तीनों विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि के पुस्तकालयाध्यक्षों की एक बैठक शनिवार को दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि मुरथल के कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी, जिसमें जीजेयू हिसार से पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. विनोद, वाईएमसीए फरीदाबाद से डॉ. पीएन वाजपेयी और मुरथल विवि से डॉ. मेहर सिंह शामिल हुए। इस दौरान वीसी प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत के सामने प्रजेंटेशन दिया गया। इस दौरान रजिस्ट्रार प्रो. अनिल खुराना और शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. राजकुमार भी मौजूद रहे। बैठक में कुरुक्षेत्र विवि के पुस्तकालय अधीक्षक चेतन शर्मा भी शामिल हुए और उन्होंने पूरी प्रक्रिया को बारीकी से देखा।
बैठक में ये लिए निर्णय : बैठक में निर्णय लिए गए कि सभी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि एक ऑफिसियल ई-मेल आईडी बनाएंगे, जिसके माध्यम से विवि के पुस्तकालयों में उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग तीनों तकनीकी विवि के शोधार्थी, विद्यार्थी और शिक्षक कर सकेंगे। पुस्तकालय के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी सुगमता के साथ पुस्तकालय सदुपयोग कर सकेंगे।
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पुस्तकालय के बिना शोध अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकता : प्रो. अनायत
कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि पुस्तकालय हमारे समाज और देश का महान कल्याण करते हैं। देश और समाज की उन्नति में पुस्तकालय सर्वाधिक सहायता करते हैं। हमारे धन और श्रम की बचत करते हैं। हमारी कठिनाइयों को दूर करते हैं। हमको अंधकार से प्रकाश की ओर लेे जाते हैं। हमारे मस्तिष्क को ज्ञान-विज्ञान से पूर्ण करते हैं। विभिन्न विषयों में अनुसंधान करने वाले शोधार्थियों को यदि पुस्तकालयों का सहारा नहीं मिले तो वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकते। नए-नए अनुसंधान और आविष्कारों को उपलब्ध कराने का श्रेय पुस्तकालयों को ही जाता है। प्रत्येक नए ज्ञान का आधार प्राचीन ज्ञान ही होता है। प्राचीन ज्ञान पुस्तकालय में ही संरक्षित होता है।
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