सोनीपत। कुष्ठ रोग या कोढ़ (लेप्रोसी) को वर्ष 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य है। जिले में अभी 25 कुष्ठ रोगी चिह्नित हैं व अन्य का पता लगाने के लिए घर-घर सर्वे कराया जाएगा। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जल्द घर-घर सर्वे अभियान चलाया जाएगा।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में कुष्ठ के संदिग्ध रोगियों की पहचान करेंगे। इसके बाद संदिग्ध मरीज को संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुलाया जाएगा, जहां उनका उपचार किया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों को रोग को पहचान करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। कुष्ठ रोग में शरीर पर सफेद चकत्ते बन जाते हैं जहां का हिस्सा सुन्न रहता है। इस स्थान पर कोई नुकीली वस्तु चुभोने पर दर्द का अहसास नहीं होगा। कुष्ठ रोग के मरीज को शरीर के विभिन्न अंगों, खासतौर पर हाथ-पैर में ठंडे या गर्म मौसम का अहसास नहीं होता है। इस तरह के लक्ष्य वाली संदिग्ध मरीजों को चिन्हित कर अस्पताल में जांच कराने का प्रावधान किया जाएगा।
समाज में कुष्ठ रोगियों की पहचान काफी समय बाद हो पाती है, इसकी वजह से कुष्ठ रोगी अन्य लोगों को संक्रमित करता रहता है। बाद में कुष्ठ रोगी के स्वयं के भी शरीर में काफी विकृतियां पैदा हो जाती हैं। कुष्ठ रोग को प्रारंभिक अवस्था में ही पता करने के लिए आशा कार्यकर्ता व एएनएम से घर-घर सर्वे 14 दिन का कराया जाएगा। यह सर्वे शहरी, ग्रामीण, कच्ची बस्तियों में कराया जाएगा। वहां कुष्ठ रोगी मिलने पर निशुल्क उपचार दिया जाएगा।
जिन इलाकों में कुष्ठ रोगी मिल चुके, उनमें अब घर-घर जाकर कुष्ठ रोगी की पहचान की जाएगी। आशा कार्यकर्ता व एएनएम से घर-घर सर्वे 14 दिन का कराया जाएगा। कुष्ठ रोगी मिलने पर उनका उपचार किया जाएगा।
- डाॅ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन