बीपीएस महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां के माडू सिंह मेमोरियल आयुर्वेदिक कॉलेज के डीन और प्रोफेसर डॉ. महेश दाधीच कोरोना से संक्रमित हो गए थे। सैंपल देने के पांच दिन बाद रिपोर्ट पॉजिटिव मिली तो परिवार के सदस्यों की भी जांच कराई। जांच में पत्नी, बेटा व बेटी भी पॉजिटिव मिले। सभी में अलग-अलग लक्षण मिले। परिवार के किसी सदस्य ने नकारात्मक विचारों से बचने के लिए फिल्मों का सहारा लिया और आयुर्वेद से कोरोना की जंग जीती। अब कोरोना से जंग जीतकर उन्होंने फिर से अपनी ड्यूटी संभाल ली।
डॉ. महेश दाधीच ने 19 अप्रैल को सैंपल दिया था तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। जिसके बाद वह होम आइसोलेट हो गए और इसकी जानकारी परिचितों को देने के साथ ही संपर्क में आए लोगों को जांच कराने को कहा। साथ ही पत्नी सीमा दाधीच, बेटी प्रेक्षा और बेटे तपस की जांच कराई तो वे भी पॉजिटिव मिले। डॉ. महेश दाधीच ने बताया कि उनको हल्का बुखार, गले मे खराश, सूखी खांसी व हल्का बदन दर्द था। उनकी पत्नी सीमा को उल्टी-दस्त, हल्का बुखार, मुंह का स्वाद व सुगंध का नहीं आना, बदन दर्द व पेट दर्द था। बेटी को सिर्फ हल्का बुखार था। इसके अलावा बेटे को उल्टी, तेज बुखार, मुंह का स्वाद और गंध का नहीं आना, बदन दर्द व पेट दर्द थे। ऐसे में वह स्वयं आयुर्वेद के चिकित्सक हैं तो उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों का सिर्फ आयुर्वेद का उपचार ही किया।
नहीं आने दिए नकारात्मक विचार, हल्के खाने का किया सेवन
डॉ. महेश ने बताया कि संक्रमण के दौरान कुछ लोगों को नकारात्मक विचार आने लगते हैं, जो सही नहीं हैं। सकारात्मक विचारों को रखकर अपना इलाज कराना चाहिए। इसी को लेकर उन्होंने परिवार समेत इलेक्ट्रॉनिक की बजाय प्रिंट मीडिया की खबर ही पढ़ी। दिन में टीवी पर रोजाना एक सकारात्मक फिल्म जरूर देखी थी। इसके अलावा हल्का खाने का सेवन किया। विटामिन सी की कमी को दूर करने के लिए रोजाना आंवला के मुरब्बे का सेवन किया और नींबू पानी पिया। यही नहीं सांस लेने में दिक्कत होने पर 20-30 मिनट उल्टा लेटकर नींद ली। उन्होंने इस विधि का वीडियो भी बनाया।
लक्षण दिखते ही शुरू कराएं जांच व उपचार
डॉ. महेश दाधीच ने कहा कि इस माहौल में लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कोरोना के लक्षण दिखते ही जांच व उपचार शुरू करना चाहिए। क्योंकि इम्यूनिटी के आधार पर लक्षण मिलते हैं। समय रहते इससे जंग जीत सकते हैं।