किसान आंदोलन के छह महीने व केंद्र सरकार के सात साल पूरे होने पर किसानों ने बुधवार को काला दिवस मनाया। किसानों ने विरोध जताने के लिए काली पगड़ी बांधी तो महिलाओं ने काली चुनरी पहनी और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कुंडली बॉर्डर के धरना स्थल पर कई जगह पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका गया तो किसान मोर्चा ने देश के अधिकतर राज्यों में काफी जगह काला दिवस मनाए जाने की बात कही है। किसान नेताओं ने कहा कि वह कृषि कानून रद्द होने के बाद ही आंदोलन खत्म करके वापस जाएंगे। इसलिए ही किसानों ने बातचीत के लिए कदम बढ़ाया है तो अब सरकार का इंतजार है।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़ के अनुसार कुंडली बॉर्डर के मुख्य मंच पर बुधवार को सबसे पहले बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई और महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद किसानों ने अपने वाहनों व ट्रैक्टर-ट्रॉली पर काले झंडे लगाए और काले झंडे लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर पार्कर मॉल के पास हाईवे के अलावा किसान मोर्चा के अस्थायी कार्यालय व मुख्य मंच के पास किसानों ने प्रदर्शन करके पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने का खूब प्रयास कर रही है, लेकिन किसान का हौसला टूटने वाला नहीं है और कृषि कानून रद्द होने के बाद ही किसान यहां से वापस जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत शुरू करने की बात कहती थी, लेकिन अब किसानों ने बातचीत के लिए कदम बढ़ाया है और अब सरकार अगर बातचीत नहीं करती है तो उसका झूठ सभी के सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान को चाहे कितना भी समय लगे, लेकिन यह आंदोलन मांग पूरी होने के बाद ही खत्म होगा।
देश के अधिकतर राज्यों में काला दिवस मनाए जाने का दावा
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के खिलाफ बुधवार को काला दिवस देश के अधिकतर राज्यों में मनाया गया है। उनके अनुसार हरियाणा, पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बंगाल, जम्मू कश्मीर, असम आदि में अधिकतर जगहों पर लोगों ने अपने घरों पर काले झंडे लगाए और पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका।