बहादुरगढ़। लखनऊ अग्निकांड के बाद भी शहर की फैक्टरियों और कोचिंग सेटरों में विभाग फायर सेफ्टी के मानकों की जांच नहीं कर पा रहा है। पिछले एक महीने में सात हजार फैक्टरियों में से सिर्फ 45 की ही जांच हो पाई है। यही हाल कोचिंग सेंटरों का वहां भी विभाग तय समय में जांच नहीं कर पा रहा है। ऐसे में अधिकांश संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अब भी जांच के दायरे से बाहर है। विभाग की ओर से सोमवार को बहादुरगढ़ के कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों और बैंक्वेटल हॉल संचालकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
फायर विभाग की ओर से औद्योगिक इकाइयों, निजी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में फायर सिस्टम की जांच का अभियान चलाया जा रहा है। शहर में छोटे-बड़े 20 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई तंग गलियों और छोटे भवनों में चल रहे हैं। रविंद्र कुमार, आजाद सिंह, पवन शर्मा, विपिन अग्रवाल, विवेक कुमार ने कहा कि जिस तरह बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उसी अनुपात में अग्नि सुरक्षा जांच भी नियमित और तेज गति से होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि फायर सिस्टम सही तरीके से काम न करे तो बड़ा हादसा हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण निरीक्षण अभियान अपेक्षित गति से नहीं चल पा रहा है। विभाग चरणबद्ध तरीके से सभी संस्थानों की जांच कर रहा है। जिन संस्थानों में फायर सुरक्षा मानकों में कमी मिलेगी, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए जाएंगे। निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
कई दिनों से शहर में फायर विभाग की ओर से जांच अभियान चलाया जा रहा था। अब उन संस्थानों की पहचान की गई है, जिसमें फायर सिस्टम नहीं लगे हैं। सोमवार को ऐसे कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उनके संचालकों को जल्द से जल्द फायर सिस्टम मजबूत करने के लिए कहा जाएगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-रविंद्र कुमार, फायर अधिकारी, बहादुरगढ़।