17 सितंबर 2015 पीएम नरेंद्र मोदी, 65 साल के हो गए। उनके जन्मदिन पर नेताओं ने फोटो खिंचवाने के लिए कई जगह झाड़ू उठाई, लेकिन शहर की प्राथमिक पाठशाला कालूपुर के बच्चों ने गुरुवार सुबह झाडू़ मजबूरी के चलते उठानी पड़ी, क्योंकि उनके स्कूल में पिछले छह महीने से सफाई कर्मचारी नहीं है।
ऐसे में प्रतिदिन खुद ही सफाई करके ज्ञान के अक्षर सीखने पड़े रहे हैं। पूछने पर जिला शिक्षा अधिकारी परमेश्वरी हुड्डा ने कहा कि वे स्कूल के बच्चों की परेशानी से वाकिफ हैं। जल्द समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
कालूपुर चुंगी के नजदीक चार दशक से प्राथमिक पाठशाला है, जहां कालूपुर गांव ही नहीं, आसपास की कॉलोनियों के बच्चे पढ़ने आते हैं। पांचवीं तक के स्कूल में 250 के करीब विद्यार्थी हैं, जिन्हें सात शिक्षक और शिक्षिकाएं पढ़ाती हैं। शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में मंजीत नाम का सफाई कर्मचारी कार्यरत था, जो छह महीने से नहीं आ रहा है। इस कारण प्रतिदिन स्कूल की सफाई करनी पड़ती है।
कभी छात्र और छात्राएं खुद कर लेते हैं। स्कूल के हेडमास्टर बीमार हैं, ऐसे में वे भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी परमेश्वरी हुड्डा को पूरे मामले के बारे में व्यक्तिगत तौर पर भी शिक्षकों ने अवगत कराया था। वे स्कूल में देखने भी आईं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला।
स्कूल में सीवर का पानी, बच्चे हो रहे बीमार
प्राथमिक पाठशाला में सफाई कर्मचारी की ही कमी नहीं, बल्कि सीवरेज का गंदा पानी भी अंदर घुस रहा है। डेंगू के प्रकोप के बीच बच्चे बीमार हो रहे हैं। क्योंकि स्कूल के अंदर खड़ा गंदा पानी मच्छर पैदा कर रहा है। बुधवार को ही मुख्य अध्यापक का कार्यभार संभाल रही शिक्षिका ने दो छात्रों को बुखार के चलते घर भेज दिया।
बस्तों से खाना निकाल कर ले जाते हैं बंदर
स्कूल के एक तरफ सरकारी गोदाम है। साथ ही स्कूल के अंदर काफी पेड़ हैं, जहां बंदर बैठे रहते हैं। मौका पाकर बंदर कमरों में घुसकर बच्चों के बस्तों से खाना और पानी की बोतल निकाल कर ले जाते हैं। ऐसे में डर के साए में बच्चे कितने शिक्षित हो पा रहे हैं, यह तो इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है।
कालूपुर प्राथमिक पाठशाला के छात्रों की परेशानी का उन्हें अंदाजा है। स्कूल के शिक्षकों से उनकी बात हुई है, जल्द सफाई कर्मचारी की व्यवस्था कर दी जाएगी। -परमेश्वरी हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी