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हे भगवान, तेरी व्यवस्था

Fri, 18 Sep 2015 12:31 AM IST
विजय शंकर झा/अमर उजाला सोनीपत
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दिल्ली से सटे सोनीपत में भी डेंगू के डंक ने दर्जनों गांवों को अपने आगोश में ले लिया है। अब तक डेढ़ से दर्जन से अधिक डेंगू के संदिग्ध पीड़ितों की मौत हो चुकी है। इधर, गांव जैनपुर टिकोला और बेगा में एक-एक महिला की बुखार से जान चली गई। बेगा में तो बुखार से दर्जन भर से ज्यादा मौत होने का मामले सामने आ चुके हैं। डेंगू पर फिलहाल कोई नियंत्रण नहीं दिखाई दे रहा।
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डेंगू संभावित मरीजों से निजी अस्पताल खचाखच भरे हैं जबकि ऐसी स्थिति में नागरिक अस्पताल में मरीजों का उपचार रामभरोसे छोड़ दिया है। न तो डॉक्टरों के आने का ठिकाना है और न ही जाने का। आखिरकार इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

बृहस्पतिवार को ऐसे सैकड़ों मरीज को उस समय मायूसी के साथ लौटना पड़ा जब ब्लड स्लाइड की रिपोर्ट लेने के बाद डॉक्टरों के पास उपचार के लिए पहुंचे, लेकिन इन मरीजों को न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई उपचार। डेंगू के इलाज के जिला स्वास्थ्य विभाग कितना सतर्क है, यह देखने के लिए अमर उजाला की टीम सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंची और वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
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सुबह 9 बजे तक नहीं था डॉक्टर
बाल रोग विभाग के बाहर तीन दर्जन से अधिक मरीज उपचार के लिए पंक्तियों में खड़े थे। सुबह नौ बज चुके थे। सभी अपने-अपने बच्चों के उपचार के लिए सुबह 7:30 बजे से डॉक्टर के इंतजार में खड़े थे। 8 बजे डॉक्टर के आने का समय था, लेकिन मरीजों का इंतजार लंबा होता जा रहा था। इंतजार करते-करते कुछ मरीज फर्श पर ही बैठ गए। जैसे ही घड़ी की सुई ने नौ बजे को पार किया तभी डॉक्टर साहब की इंट्री हुई। इसके बाद मरीजों की जान में जान आई।

1 बजे के बाद मायूसी के साथ लौटे बच्चे
दिन के 1:20 मिनट हो रहे थे। बुखार से पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन बाल रोग विभाग में उपचार के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन डॉक्टर को वहां मौजूद नहीं देख परिजन बच्चों को इधर-उधर ले जाते दिखाई दिए। हालांकि उन्हें सभी जगह निराशा ही हाथ लगी। उपचार नहीं मिलता दिखाई दिया तो मजबूरन लौटना पड़ा।

1:30 बजे मची अफरातफरी
लगभग 1:30 बजे ब्लड सैंपल की रिपोर्ट लेने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लग चुकी थी। लैब इंचार्ज मरीजों को पुकार उनकी रिपोर्ट सौंप रहे थे। इधर, बाल रोग विभाग के बाहर फिर से मरीजों की लाइन शुरू हो चुकी थी। लाइन लंबी होती गई, लेकिन डॉक्टर नहीं होने की स्थिति में उनके हाथ में आई रिपोर्ट धरी की धरी रह गई। इधर-उधर मरीज घूमकर फिर से वापस चले गए।

क्या कहते हैं मरीज
उन्हें दो दिनों से बुखार है। जांच के लिए खून की जांच कराई थी। रिपोर्ट तो मिल गई, लेकिन उस रिपोर्ट को देखने वाला कोई डॉक्टर ही नहीं है। -हुकुम सिंह

उनके दोनों बच्चे बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन वह चक्कर काट रहे हैं। दोनों बच्चों की रिपोर्ट मिल गई, लेकिन इन बच्चों में क्या बीमारी है कोई बताने वाला नहीं है। -रमेश

उसकी लड़की आरती पिछले दो दिनों से बुखार से जल रही है। पहले इमरजेंसी पहुंचे जहां उन्हें कमरा नंबर पांच में जाने के लिए कहा गया, लेकिन यहां तो कोई डॉक्टर है ही नहीं। सिविल सर्जन कार्यालय भी गया, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। -आरती अपने पिता के साथ

बच्चे को चार दिनों से बुखार है। बुखार की वजह से बच्चे की परीक्षा तक छूट गई। -कन्हैया अपनी नानी सीता के साथ

गांव जैनपुर टिकोला में 50 से ऊपर लोगों में दिखाई दे रहे डेंगू के संदिग्ध लक्षण
गांव जैनपुर टिकोला निवासी राजकुमारी (50) नामक एक महिला की मौत हो गई। परिजनों ने मौत का कारण डेंगू बताया है। परिजनों ने बताया कि पिछले पांच दिनों से बुखार से पीड़ित थी। जिसका एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। निजी अस्पताल वालों ने उसे डेंगू करार दिया था। इधर, गांव में फिर से डेंगू के डर लोगों में सता रहा है। लगभग 50 से ऊपर ग्रामीणों का किसी न किसी निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। परिजनों का कहना है कि सभी में डेंगू के संदिग्ध लक्षण नजर आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू के नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही।

बेगा गांव में बुखार ने ली एक और महिला की जान
गन्नौर। उपमंडल के गांव बेगा में बुखार की चपेट में आने से एक 31 वर्षीय महिला की मौत हो गई। ग्रामीणों द्वारा महिला की मौत का कारण डेंगू बुखार बताया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है। गांव बेगा निवासी गीता पत्नी सुंदरलाल को चार दिन पहले बुखार हो गया था। बुखार होने से परिजनों ने उसे सोनीपत के निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया। परिजनों ने बताया कि गीता की गत रात तबियत ज्यादा बिगड़ गई और उसने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गांव में बुखार से दर्जन भर से ज्यादा मौत हो चुकी हैं और यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

वर्तमान में डॉक्टरों की कमी जरूर है, लेकिन उपचार के नाम पर किसी भी मरीज को वापस नहीं लौटना पड़ रहा। सभी डॉक्टरों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचे। सभी मरीजों को देखने के बाद ही डॉक्टर अस्पताल छोड़ रहे हैं, यदि उन्हें पास किसी डॉक्टर के समय से पहले जाने और देर से आने की सूचना सही पाई गई तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
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