फोटो :31: सोनीपत के गांव राई में अपनी छत पर उगाए पौधों की देखभाल करती प्रोमिला कौशिक। संवाद
सोनीपत। गांव राई निवासी प्रोमिला कौशिक का छोटा सा शौक आज छत पर लहलहाती बगिया में बदल गया है। शुरुआत महज पांच गमलों से हुई और आज पूरी छत की बागवानी में 62 फूलों के गमले व सजावटी पौधे हैं।
हरियाली की कसक ने छत को ही बगिया बनाने की प्रेरणा दी। मेहनत, धैर्य और प्रकृति के साथ तालमेल ने इस शौक को एक सार्थक पहल बना दिया।
प्रोमिला की छत पर आज पालक, धनिया, मिर्च और चौलाई जैसी ताजी सब्जियां लहलहाती हैं। साथ ही तुलसी, पुदीना, हल्दी, काली अदरक जैसे औषधीय पौधे और गुलाब, सदाबहार, मेडागास्कर जैसे सजावटी पौधे भी हरियाली में रंग भरते हैं।
खास बात यह है कि यहां सब कुछ जैविक तरीके से उगाया जाता है। सूखे पत्ते, सब्जियों का कचरा और रसोई का पानी इनसे घर पर ही खाद तैयार की जाती है, जिसमें थोड़ा सा गाय का गोबर मिलाया जाता है।
कीटों से बचाव के लिए नीम, अदरक, मिर्च और लहसुन के अर्क से बने प्राकृतिक कीटनाशक इस्तेमाल होते हैं।