परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े गांव के पंच।
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शिक्षा विभाग के अधिकारी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल पर नकेल डालने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, नकल के कारण गांवों की नाम भी खराब हो रहे हैं। ऐसे में नकल रहित परीक्षा करवाने के लिए आहुलाना गांव की पंचायत आगे आई है, ताकि गांव का नाम खराब न हो। सरपंच अशोक कुमार का कहना है कि सरकार की मदद करना सभी की जिम्मेदारी बनती है। जिले में विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर हो रही नकल को देखते हुए पंचायत ने अपने गांव नकल रहित परीक्षा करवाने का निर्णय लिया है, ताकि प्रशासन को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़ेे।
बोर्ड की परीक्षाओं में आए दिन नकल के केस बनाने व नकल करते पकड़े जाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें स्वयं गांव के लोग नकल कराने वालों में शामिल हो रहे हैं। इसके ठीक विपरीत अब गांव आहुलाना की पंचायत ने नकल रहित परीक्षा कराने का बीड़ा उठाया है। आहुलाना गांव में पंचायत के कुल 16 सदस्य हैं, जिनमें से पांच से छह सदस्य रोजाना परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी दे रहे हैं तथा पुलिस व शिक्षा विभाग के स्टाफ के साथ मिलकर नकल रोकने में मदद कर रहे हैं। वे गांव के लोगों को भी परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं घुसने देते।
बारी-बारी से दे रहे ड्यूटी
गांव के पंच सुरेश, रमेश व जोगेंद्र ने बताया कि नकल रोकने के लिए रोजाना गांव के पंच व सरपंच बारी-बारी परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी दे रहे हैं ताकि बाहरी लोग परीक्षार्थियों को परेशान न करें तथा स्कूल के अंदर घुसकर नकल न डालने पाएं।
खंड शिक्षा अधिकारी सुभाष भारद्वाज का कहना है कि नकल पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा रहा है। इसमें गांव के लोगों का सहयेाग मिलने से परीक्षा केंद्रों पर भीड़ भी कम हो रही है। साथ ही विभाग द्वारा भी लगातार नकल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है।