ईरान में होने वाले कुश्ती वर्ल्डकप के लिए रवाना होते पहलवान
- फोटो : bureau
कुश्ती वर्ल्डकप में भारत का मेडल का सूखा खत्म करने के लिए म्हारे पहलवान ईरान पहुंच गए हैं। वहां 17-18 फरवरी तक कुश्ती वर्ल्डकप खेला जाएगा, जिसमें भारत की ओर से हरियाणा के सात पहलवान भिड़ेंगे तो एक पहलवान पंजाब का होगा। इन सभी का नेशनल कैंप सोनीपत के साई सेंटर में लगा था, जहां से यह सभी सोमवार शाम को रवाना हुए। कुश्ती के चीफ कोच जगमिंद्र सिंह पर भी बड़ी जिम्मेदारी है।
ईरान में 17-18 फरवरी तक होने वाले कुश्ती वर्ल्डकप में दुनिया के उन आठ देशों के पहलवान हिस्सा लेंगे जो एक साल में हुई अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कुश्ती में सबसे ऊपर रहे हैं। इनमें रसिया, अजरबैजान, यूएसए, जार्जिया, ईरान, तुर्की, भारत, मंगोलिया के पहलवान शामिल हैं। इसके लिए भारत के आठ पहलवान ईरान में गए हैं, जिनमें से सात अकेले हरियाणा के रहने वाले हैं तो चार पहलवान सोनीपत जिले से ताल्लुक रखते हैं। यह सभी पहलवान ईरान में देश के लिए अलग-अलग भार वर्ग में पदकों की दावेदारी पेश करेंगे। इनमें 57 किलो में सोनीपत के अमित दहिया, 61 किलो में सोनीपत के हरफूल, 65 किलो में झज्जर के बजरंग पूनिया, 70 किलो में रोहतक के अमित धनखड़, 74 किलो में गुड़गांव के जितेंद्र, 86 किलो में सोनीपत के दीपक, 97 किलो में पंजाब के रूबलजीत सिंह, 125 किलो में सोनीपत के कृष्ण कुमार पदक के लिए लड़ेंगे। इस वर्ल्डकप में भारत के पदक जीतने की बड़ी उम्मीद है, क्योंकि पहली बार एक साथ इतने हरियाणा के पहलवान वर्ल्डकप में हिस्सा ले रहे हैं।
मेडल लाने की पूरी उम्मीद
कोच जगमिंद्र सिंह ने बताया कि जिस तरह से पहलवानों को दांवपेंच बताए गए हैं और पहलवानों ने प्रैक्टिस में खूब पसीना बहाया है, उससे यही उम्मीद जताई जा सकती है कि देश के लिए मेडल जरूर जीतेंगे। वहीं कोच कहते हैं कि कुश्ती चंद सेकेंड का खेल है और पहलवान की एक सेकेंड की कमजोरी ही उसे बाहर करा देती है। इसलिए हर दांव के बारे में पहलवानों को बताया गया है कि किस दांव से कैसे पार पाया जा सकता है।