नौकरियों के लिए भले ही मारामारी मची हुई हो, लेकिन सरकारी विभागों में भर्ती नहीं होने के कारण आज भी आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हुए है। यहां मुरथल की दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी में कुछ ऐसे ही हालात हैं। यूनिवर्सिटी में 10 साल बाद ही प्रोफेसरों के 386 में 212 पद खाली पड़े हुए है, जिनमें प्रोफेसर से लेकर एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर तक के पद शामिल हैं। हालात यह है कि यूनिवर्सिटी में पार्ट टाइम प्रोफेसर रखकर पढ़ाई करानी पड़ रही है, जिससे छात्रों की पढ़ाई ज्यादा प्रभावित न हो सके। नॉन टीचिंग स्टाफ की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है और उनके 224 पद खाली पड़े हुए है। इन खाली पदों को भरने के लिए न यूनिवर्सिटी प्रशासन गंभीर दिख रहा है और न ही सरकार इस पर ध्यान दे रही है।
2006 में बनी यूनिवर्सिटी
दीनबंधु छोटूराम प्रौद्योगिकी एवं तकनीकि कॉलेज की नींव 1986 में रखी गई थी, जिसे सरकार ने 2006 में दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी बना दिया। सरकार को इसे यूनिवर्सिटी बनाए हुए भले ही 10 साल से ज्यादा का समय बीत गया हो, लेकिन यहां आज भी हालात बदतर दिखाई देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आजतक यूनिवर्सिटी को पूरे प्रोफेसर तक नहीं मिल सके हैं। यूनिवर्सिटी में इस समय लगभग 4000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनके लिए वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर कर दिया गया है, लेकिन जिन प्रोफेसरों की सबसे ज्यादा जरूरत होनी चाहिए, उनकी भर्ती आजतक नहीं की गई है।
45 प्रोफेसर कांट्रेक्ट बेस पर, 28 पार्ट टाइमर
यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरों के 386 पद है, जिनमें से 212 आज तक खाली हैं और 174 स्थायी प्रोफेसर कार्यरत हैं। इस कारण ही 45 प्रोफेसरों को कांट्रेक्ट बेस पर लगाया गया है तो 28 पार्ट टाइम में यूनिवर्सिटी के छात्रों को पढ़ा रहे हैं।
नॉन टीचिंग की भी स्थिति खराब
ऐसी ही कुछ नॉन टीचिंग स्टाफ की स्थिति है। यूनिवर्सिटी में नॉन टीचिंग के 463 पदों में केवल 239 ही पद भरे हुए हैं, जबकि 224 पद आज भी खाली हैं। हालांकि अब यूनिवर्सिटी प्रशासन जल्द ही प्रोफेसरों की भर्ती किए जाने की बात कह रहा है, लेकिन यह भर्ती प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, यह अभी बता पाना मुश्किल है।
4000 छात्रों को कैसे पढ़ाएं 174 प्रोफेसर
यूनिवर्सिटी में इस समय लगभग 4000 छात्र हैं और उनको पढ़ाने के लिए 174 प्रोफेसर हैं। ऐसे में लगभग 23 छात्रों पर एक प्रोफेसर है और इन प्रोफेसरों के सहारे ही रिसर्च कराने के साथ ही अन्य जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई प्रोफेसर किस तरह से स्लेबस पूरा करा सकते हैं। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी में 10 साल बीतने के बावजूद पूरी भर्ती नहीं हो सकी है, जबकि विभाग लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
नॉन टीचिंग के पद बढ़ते गए, भर्ती की रफ्तार धीमी रही
यूनिवर्सिटी में इस समय जिन नॉन टीचिंग के 224 पद खाली हैं, उनके पद 2013 तक लगातार बढ़ते चले गए, लेकिन उनकी भर्ती उस तेजी से नहीं हो सकी और आजतक कम स्टाफ की परेशानी को झेली जा रही है। जहां 2008 में 206 पदों पर 156 का स्टाफ था, वहीं 50 पद खाली पड़े थे। जुलाई 2008 में पदों को बढ़ाकर 357 कर दिया गया और स्टाफ केवल 138 रहने से 219 पद खाली थे। दिसंबर 2010 में दो पद बढ़े तो खाली पद 221 हो गए। जनवरी 2012 में 104 पद बढ़ाने से 463 हो गए, लेकिन उस समय भर्ती होने से 242 पद खाली रहे और 221 का स्टाफ तैनात हो गया। वहीं, मार्च 2013 में फिर से भर्ती होने पर स्टाफ 239 जरूर हो गया, लेकिन फिर भी 224 पद खाली पड़े हुए हैं।
यूनिवर्सिटी में जल्द ही भर्ती की जाएगी, जिसके लिए तैयारी कर ली गई है। इसके लिए जल्द विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा, जिससे काफी पदों को भरा जा सके। इसके लिए पूरा कार्यक्रम तय हो गया है और इसकी प्रक्रिया भी जल्द शुरू हो जाएगी। इससे प्रोफेसरों के खाली पदों की संख्या काफी कम रह जाएगी।
-केपी सिंह, रजिस्ट्रार, दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी