नगर निगम अफसरों की लापरवाही से 45 कॉलोनियों के वैध होने में अड़ंगा लग गया और उनकी फाइल को मुख्यालय से वापस लौटा दिया गया है। निगम अफसरों ने उस फाइल को पूरा करने की जगह अधूरा ही वहां भेज दिया था, जिससे यहां से भेजी गई फाइलों में काफी कमियां पाई गईं। इससे इन 45 कॉलोनियों के वैध होने का इंतजार बढ़ गया है, जो छह महीने तक का हो सकता है। वहीं, अधिकारी जल्द ही फाइल को सुधार कर दोबारा मुख्यालय भेजने का दावा कर रहे है, जिससे कॉलोनियां वैध हो सकें।
सोनीपत नगर परिषद को नगर निगम बनाया गया तो इसके अंतर्गत आने वाली अवैध कालोनियों को वैध कराने के लिए सर्वे किया गया था। सर्वे के दौरान 45 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया गया, जिनको वैध कराने के लिए सरकार के पास प्रपोजल तैयार कर एक माह पहले ही भेजा गया, लेकिन इन कॉलोनियों में रहने वालों को उस समय झटका लगा, जब मुख्यालय से उस फाइल को तकनीकी खामियां बताकर वापस कर दिया।
कालोनियों का भी हुआ था गलत सर्वे
करीब पांच माह पहले निगम की ओर से अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए सर्वे किया गया था। सर्वे प्रक्रिया शुरू की गई थी तो उसमें गड़बड़ी पाई गई। नगर निगम की ओर से पहले अनुभव हीन एजेंसी को कॉलोनियों का सर्वे करने के लिए ठेका दिया गया था। एजेंसी की ओर से गलत सर्वे रिपोर्ट देने के बावजूद निगम पुन: सर्वे करने के लिए मौका उसी एजेंसी को दिया गया। इसके बाद अक्तूबर में रिपोर्ट फाइनल तैयार होने के बाद नगर निगम ने सूची मुख्यालय भेज दी थी।
सर्वे के आधार पर इन कॉलोनियों का हुआ था चयन
सर्वे के आधार पर नगर निगम ने 45 अवैध कालोनियों की सूची भेजी थी उनमें से सरस्वती विहार पार्ट-1, सरस्वती पार्ट-2, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, प्रगति विहार, आनंद विहार, इंडियन कालोनी एक्सटेंशन, हनुमान नगर एक्सटेंशन, राजीव विहार, जीवन विहार एक्सटेंशन व विकास नगर एक्सटेंशन, मुरथल की दुर्गा कॉलोनी, अटल कालोनी, मुरथल पार्ट-1, पार्ट-2, पार्ट-4, पार्ट-5, मुरथल की शिव कॉलोनी, खेवड़ा पार्ट-1, पार्ट-2, पार्ट-3, पार्ट-4, राई पार्ट-1, पार्ट-2, लिवासपुर पार्ट-1, जठेड़ी, शिव कॉलोनी, बहालगढ़, बंदेपुर, बैयांपुर, चौहान जोशी, देवडू, फाजिलपुर, गढ़शहजानपुर, लहराड़ा, मोहन नगर, रायपुर, आरके कॉलोनी, शाहपुर तुर्क, राठधाना, कुमासपुर व रेवली का चयन वैध करने के लिए किया गया है। नगर निगम के गठन के दौरान डेढ़ साल पहले 26 पंचायतों को नगर निगम में शामिल किया गया था। इसमें लाल डोरे से बाहर का एरिया भी पूरी तरह से अवैध है, जिनमें कॉलोनियां बसी हुई हैं।
आरडब्ल्यूए गठन के लिए करीब डेढ़ दर्जन कॉलोनियों के लोग आए
निगम की योजना है कि जो कॉलोनी अवैध कालोनी का तमगा हटाकर विकास कार्य करवानी चाहती है, उसे आरडब्ल्यूए यानी रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया जा रहा है। इसके नाम से बैंक में निगम अकाउंट खुलवा जाएगा। ये एसोसिएशन लोगों से विकास शुल्क एकत्रित कर एस्क्रो खाते में जमा कराएगी। उस कॉलोनी के लोगों को एक हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क जमा करवाना होगा। जिन कॉलोनियों के लिए एक साल में 50 फीसद शुल्क जमा करवा दिया जाता है तो उस कॉलोनी को वैध का दर्जा दे दिया जाएगा। तब निगम कॉलोनी को वैध मानकर विकास कार्य करवाएगा। अब तक डेढ़ दर्जन कालोनियों के लिए लोग सामने आए हैं, लेकिन आरडब्ल्यूए का गठन होगा बाकी है।
निगम की ओर से 45 अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार कर वैध कराने के लिए मुख्यालय भेजा गया था, लेकिन वह सूची वापस आ चुकी है। इसमें कुछ तकनीकी कारण बताए गए हैं। उन कारणों को दूर कर सूची को वापस भेज दिया जाएगा।
अशोक मलिक, एक्सईएन, नगर निगम