मरीजों को अब आयुष विभाग में दवाओं की कमी नहीं खलेगी। पिछले दो माह से यहां पर दवाओं का संकट होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब विभाग के पास चार लाख रुपये की दवाएं मुहैया होने पर संकट खत्म हो गया है। विभाग की ओर से धीरे-धीरे सभी 38 स्वास्थ्य केंद्रों पर पर दवाएं मुहैया कराना शुरू कर दिया गया है।
क्षेत्र के मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का लाभ मिले, इसके लिए सामान्य अस्पताल परिसर में ही आयुष विभाग भी स्थापित किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का लाभ उठाने के लिए अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 मरीज में पहुंचते हैं। बीते करीब दो माह से विभाग में आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक खत्म पड़ा है। ऐसे में मरीजों को सुविधा का पर्याप्त लाभ नहीं मिला रहा है। अस्पताल में जांच के बाद मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
दवाएं न होने से मरीजों की संख्या हो रही थी कम
आयुष विभाग में लंबे समय से दवा खत्म होने से विभाग में स्थापित ओपीडी में मरीजों की संख्या पर पड़ रहा था। विभाग में वायु रोग, मधुमेह, चर्मरोग, बीपी, श्वास रोग, बुखार आदि बीमारियों के उपचार के लिए मरीज आते हैं। विभाग में दवा खत्म होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर निर्भर रहना पड़ रहा था। अस्पताल में दवाएं न मिलने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
38 स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचेंगी दवाएं
नेशनल हेल्थ मिशन से चार लाख रुपये का बजट मुहैया होने पर विभाग की ओर से दवाएं खरीदी गई हैं। तीन लाख रुपये की लागत से आयुर्वेदिक, 60 हजार से होम्योपैथिक व 40 हजार रुपये से यूनानी दवाएं खरीदी गई हैं। विभाग के पास 29 आयुर्वेदिक, सात होम्योपैथिक तथा दो यूनानी स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां पर सभी दवाओं की सप्लाई कर दी जाएगी।
विभाग के दवाओं के संकट को खत्म करने के लिए एनएचएम की ओर से चार लाख रुपये का बजट मुहैया हुआ था। बजट के मुहैया होने पर मरीजों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए दवाएं खरीदी गई हैं। जल्द ही विभाग की ओर से संचालित किए जा रहे सभी केंद्रों पर इन दवाओं को भेज दिया जाएगा।
डॉ. सतीश खटकड़, जिला आयुर्वेद अधिकारी