सोनीपत। पांच साल बाद भी सोनीपत-जींद रेलवे मार्ग पर चलने वाली अंतिम सवारी गाड़ी का कोरोना काल समाप्त नहीं हुआ है। यही कारण है कि सोनीपत से शाम 6:10 बजे चलने वाली यह सवारी गाड़ी जिले के छह स्टेशनों पर नहीं रुकती, जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। यात्री आगे-पीछे के स्टेशनों पर उतरने को मजबूर हैं, वहीं कई यात्री ट्रेन की बजाय बस या निजी वाहनों का ही सहारा लेते हैं। यात्रियों ने अंतिम सवारी गाड़ी का भी सभी स्टेशनों पर ठहराव करने की मांग उठाई है।
सोनीपत-जींद रेलमार्ग पर जिले से हजारों यात्री सवारी गाड़ी में आवागमन करते हैं। कोरोना काल से पहले सवारी गाड़ी का सभी स्टेशनों पर ठहराव था। कोरोना काल में इसका कई स्टेशनों पर ठहराव बंद कर दिया था। कोरोना समाप्त होने के बाद सवारी गाड़ी का सभी स्टेशनों पर ठहराव नहीं किया गया। सवारी गाड़ी सोनीपत से शाम 6:10 पर रवाना होती है। ट्रेन सीधे मोहाना व गोहाना रुकती है। बीच के स्टेशनों के यात्रियों को गोहाना या मोहाना उतरकर अन्य साधनों से जाना पड़ता है। रेल अधिकारियों का कहना है कि सवारी गाड़ी को कोरोना काल में स्पेशल का दर्जा दिया गया था। यात्रियों ने मांग की है कि सवारी गाड़ी को दोबारा पहले की तरह ठहराव कर चलाया जाए।
इन स्टेशनों पर नहीं रुकती सवारी गाड़ी
सोनीपत से शाम को चलने वाली सवारी गाड़ी जिले के छह स्टेशनों पर नहीं रुकती। इनमें बड़वासनी, लाठ, रभड़ा, खंदराई, बुटाना व ईशापुर खेड़ी शामिल हैं। इन गांवों के सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं। इनको गोहाना व मोहाना उतरकर अन्य साधनों से गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
यात्री बोले-
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अंतिम सवारी गाड़ी सभी स्टेशनों पर रुक कर नहीं चलती, जिससे हमें समस्या उठानी पड़ती है। कई बार ट्रेन के 10-15 मिनट देरी से स्टेशन पर पहुंचने के बाद विभिन्न गांवों के लिए साधन नहीं मिलते।
- संदीप, गांव बुटाना
सोनीपत से शाम 6:10 चलने वाली ट्रेन का सभी स्टेशनों पर ठहराव होना चाहिए, ताकि दैनिक यात्रियों के साथ अन्य यात्री इसका लाभ उठा सकें।
- दीपक, जागसी
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यात्रियों की समस्या उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ला दी गई है, जो विचाराधीन है। जल्द ही समस्या का उचित समाधान निकाला जाएगा।
- हिमांशु खासा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे, दिल्ली